पेरिस, 25 जुलाई (वार्ता) फ़्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने एक घोषणा में कहा कि सितंबर में होने वाली संयुक्त राष्ट्र महासभा में फ़्रांस फ़िलिस्तीनी राज्य को मान्यता देगा।
श्री मैक्रों ने गुरुवार को ‘एक्स’ पर कहा , “मध्य पूर्व में न्यायसंगत और स्थायी शांति के लिए अपनी ऐतिहासिक प्रतिबद्धता के अनुरूप, मैंने निर्णय लिया है कि फ़्रांस फ़िलिस्तीन राज्य को मान्यता देगा।”
सीएनएन की एक रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने आगे कहा, “आज की सबसे बड़ी ज़रूरत गाज़ा में युद्ध को समाप्त करना और नागरिकों को बचाना है।” उन्होंने तत्काल युद्धविराम, गाज़ा की जनता के लिए मानवीय सहायता की उपलब्धता, सभी बंधकों की रिहाई और हमास के विसैन्यीकरण का आह्वान दोहराया।
श्री मैक्रों ने आगे कहा, “हमें फ़िलिस्तीन राज्य का निर्माण करना होगा, इसकी व्यवहार्यता सुनिश्चित करनी होगी, और यह सुनिश्चित करना होगा कि इसके विसैन्यीकरण को स्वीकार करके और इज़रायल को पूरी तरह से मान्यता देकर, यह मध्य पूर्व में सभी की सुरक्षा में योगदान दे। इसके अलावा कोई विकल्प नहीं है।”
फ़्रांसीसी विदेश मंत्री जीन-नोएल बैरोट ने कहा कि यरुशलम में वाणिज्यदूत ने श्री मैक्रों का एक पत्र फ़िलिस्तीनी प्राधिकरण को सौंपा है जिसमें फ़्रांस की मंशा बताई गई है।
फ़िलिस्तीनी प्राधिकरण (पीए) के उपाध्यक्ष हुसैन अल शेख़ ने “एक्स ’’ पर एक पत्र लिखकर श्री मैक्रों को पीए के अध्यक्ष महमूद अब्बास को लिखे पत्र के लिए धन्यवाद दिया।
इसके तुरंत बाद हमास ने राष्ट्रपति मैक्रों की इस घोषणा का स्वागत किया कि फ्रांस एक फ़िलिस्तीनी राज्य को मान्यता देगा।
हमास ने इसे “हमारे उत्पीड़ित फ़िलिस्तीनी लोगों के लिए न्याय प्राप्त करने और उनके आत्मनिर्णय के वैध अधिकार तथा उनके सभी अधिकृत क्षेत्रों पर एक स्वतंत्र फ़िलिस्तीनी राज्य की स्थापना का समर्थन करने की दिशा में एक सकारात्मक कदम” बताया।
हालांकि, इज़रायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने फ़िलिस्तीनी राज्य को मान्यता देने के फ़्रांसीसी राष्ट्रपति मैक्रों के फ़ैसले की निंदा की है।
प्रधानमंत्री ने एक बयान में कहा, “इस तरह का कदम आतंक को बढ़ावा देता है और गाजा की तरह एक और ईरानी छद्म राज्य के निर्माण का जोखिम पैदा करता है।”
उन्होंने आगे कहा, “इन परिस्थितियों में एक फ़िलिस्तीनी राज्य इज़रायल को नष्ट करने का एक लॉन्च पैड होगा – न कि उसके साथ शांति से रहने का। यह स्पष्ट कर दें: फ़िलिस्तीनी इज़रायल के साथ एक राज्य नहीं चाहते; वे इज़राइल के बजाय एक राज्य चाहते हैं।”
