सतना : लोक-लाज का भय इस कदर समाया कि जुड़वा बच्चों को जन्म देन के बाद मां उन्हें जिला अस्पताल के एसएनसीयू में छोडक़र गायब हो गई. प्रीमैच्योर डिलेवरी के चलते कमजोर पैदा हुए बच्चे पखवाड़े भर की उम्र भी पूरी नहीं कर सके. लेकिन बच्चों की मौत होने पर अस्पताल प्रबंधन के सामने समस्या यह खड़ी हो गई कि आखिरकार शव किसे सौंपा जाए. सक्रिय हुई पुलिस ने कड़ी मशक्कत करते हुए किसी तरह मां को खोज निकाला और दोनों बच्चों के शव उनके सुपुर्द कर दिए गए.
प्राप्त जानकारी के अनुसार मैहर जिले के रामनगर थाना क्षेत्र की निवासी एक महिला को प्रसव पीड़ा होने पर 9 जुलाई को रामनगर स्थित सिविल अस्पताल लाया गया. जहां पर महिला ने जुड़वा बच्चों को जन्म दिया. लेकिन महज 7 महीने के अंदर की प्रीमैच्योर डिलेवरी के चलते बच्चों का वजन 1 किलो से भी कम था. जिसे देखते हुए दोनों बच्चों को उपचार के लिए जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया. जिन्हें फौरन ही नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाई में भर्ती कर उपचार शुरु कर दिया गया.
बच्चों को साथ लेकर अस्पताल के एसएनसीयू पहुंचने वाली महिला ने स्वयं को बच्चों की मौसी बताया. लेकिन दोनों बच्चों को उपचाररत देख साथ आई महिला वहां से नदारद हो गई. लेकिन भर्ती होने के 8 दिन बाद एक नवजात की तबियत बिगड़ती चली गई. जिसके चलते उसने दम तोड़ दिया. वहीं दूसरा नवजात भी रिकवर नहीं कर पा रहा था. नतीजतन मंगलवार की सुबह उसकी भी मौत हो गई. जिसे देखते हुए अस्पताल प्रबंधन द्वारा महिला द्वारा दर्ज कराए गए मोबाइल नंबर पर संपर्क करने का प्रयास किया. लेकिन नंबर गलत निकला.
मामले की गंभीरता को देखते हुए एसएनसीयू के चिकित्सक डॉ. योगेश मिश्र ने अस्पताल चौकी पुलिस को सूचना दे दी. अस्पताल चौकी द्वारा इस संबंध में कोतवाली पुलिस को अवगत कराया गया. कोतवाली थाना प्रभारी रावेंद्र द्विवेदी ने जब पड़ताल शुरु की तो अस्पताल के रजिस्टर में दर्ज कराया गया पता और मोबाइल नंबर दोनों गलत निकले. जिसे देखते हुए कोतवाली पुलिस ने सिविल अस्पताल रामनगर से संपर्क कर जानकारी जुटाई और उसे रामनगर थाने के साथ साझा की. कुछ देर तक कड़ी मशक्कत करने के बाद पुलिस को बच्चों की मां के बारे में जानकारी मिल गई.
लोक-लाज का भय
रामनगर से खोज निकालने के बाद कोतवाली पुलिस महिला को लेकर जिला अस्पताल के मर्चुरी पहुंची. जहां पर दोनों बच्चों के शव को सुरक्षित रखा गया था. औपचारिक कार्रवाई पूरी करने के बाद शामके लगभग 5 बजे दोनों बच्चों के शव महिला को सौंप दिए गए. इस संबंध में जो जानकारी निकलकर सामने आई उसके अनुसार महिला के पति का निधन 2022 में हो चुका है. किसी अन्य पुरुष के संपर्क में आने के चलते वह गर्भवती हो गई. बच्चों की ममता के चलते उसने उन्हें एसएनसीयू में भर्ती तो करवा दिया. लेकिन फिर लोक लाज और सामाजिक भय के चलते उसे अपना कलेजा कड़ा करना पड़ा. लिहाजा गलत पता व नंबर बताकर वहां से भाग निकली.
