च्यवन ऋषि की तपोभूमि चंद्रकेसर तीर्थ पर श्रद्धा का सैलाब, सावन में जलाभिषेक को आ रहे हजारों भक्त

बागली। करौंदिया ग्राम पंचायत में स्थित चंद्रकेसर तीर्थ, प्राचीन आयुर्वेदाचार्य च्यवन ऋषि की तपोभूमि के रूप में प्रसिद्ध है। देवास और इंदौर से लगभग समान 70 किलोमीटर की दूरी पर स्थित यह तीर्थ स्थल चंद्रकेसर नदी के उद्गम स्थल के रूप में भी जाना जाता है। मान्यता है कि च्यवन ऋषि ने यहीं कठोर तपस्या की थी, जिसके प्रभाव से यहाँ एक अक्षय जलकुंड उत्पन्न हुआ। यह कुंड निरंतर जलधारा देता है, जिससे शिवलिंग का प्राकृतिक जलाभिषेक वर्ष भर होता रहता है। यहां के जल को युवा कांवड़ में भरकर स्थानीय शिवालयों में श्रद्धापूर्वक चढ़ाते हैं। यह सिलसिला पूरे श्रावण मास में देखने को मिलता है, परंतु सोमवार को इसकी भव्यता विशेष रूप से देखने योग्य होती है।

चंद्रकेसर तीर्थ पर ऋषि-मुनियों की प्राचीन गुफाएं, भैरव महाराज का मंदिर, एवं भगवान शंकर, दुर्गा माता, हनुमानजी, शनि महाराज, गणेशजी, रामजी सहित विभिन्न देवी-देवताओं के छोटे-छोटे मंदिर स्थित हैं, जो भक्तों के आस्था के केंद्र हैं। लगभग तीन वर्ष पूर्व ग्राम पंचायत करौंदिया द्वारा महिला एवं पुरुषों के लिए अलग-अलग स्नान कुंडों का निर्माण कराया गया, जिससे तीर्थ का स्वरूप और भी सुविधाजनक हो गया है।

हालांकि इस तीर्थस्थल तक पहुँचने में श्रद्धालुओं को सड़क की स्थिति के कारण भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। मुख्य मार्ग से चंद्रकेसर तीर्थ की दूरी लगभग 2 किलोमीटर है, लेकिन वहां तक जाने वाली सड़क मात्र 9 फीट चौड़ी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस संकरी सड़क के दोनों ओर विधर्मियों द्वारा अवैध कब्जा कर लिया गया है, जिससे तीर्थ आने-जाने वाले वाहनों को बाधा पहुँचती है और श्रद्धालुओं को असुविधा होती है।

श्रद्धालुओं ने प्रशासन से माँग की है कि च्यवन ऋषि की इस तपोभूमि तक आने वाली सड़क को अतिक्रमण मुक्त किया जाए और उसे चौड़ा कर तीर्थ यात्रा को सरल एवं सुरक्षित बनाया जाए।

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