
भोपाल। रवीन्द्र भवन में नृत्यधाम संस्था और भुवनेश्वर संस्था द्वारा संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार के सहयोग से पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की जन्म शताब्दी वर्ष के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम सांस्कृतिक महोत्सव गरिमापूर्ण वातावरण में सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम में साहित्य, राजनीति और कला जगत से जुड़े विभिन्न पक्षों पर वक्ताओं ने अटल जी के व्यक्तित्व और कृतित्व को याद किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो खेमसिंह डेहरिया सभापति निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग मध्यप्रदेश ने की। मुख्य अतिथि विधायक भगवान दास सबनानी और विशिष्ट अतिथि डॉ साधना बलवटे, डॉ नुसरत मेहंदी, गोकुल सोनी और आलोक चौबे मंचासीन रहे। मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलन और डॉ शुभश्री पटनायक के स्वागत उद्बोधन से कार्यक्रम की शुरुआत हुई।
अपने उद्बोधन में प्रो डेहरिया ने अटल जी के साहित्य, राजनीति और समाज सेवा को राष्ट्र चेतना से जुड़ा बताया और कहा कि पोखरण परमाणु परीक्षण से पूरे विश्व में भारत का मान बढ़ा। विशिष्ट अतिथि डॉ साधना बलवटे ने कहा कि अटल जी जैसे व्यक्तित्व स्मृतियों में अमर रहते हैं और उन्होंने भारतीय अस्मिता को नई पहचान दी। वहीं डॉ नुसरत मेहंदी ने कहा कि अटल जी की राजनीति करुणा, संवेदना और दृढ़ता का समन्वय को लेकर अपने विचार साझा किए। सारस्वत अतिथि गोकुल सोनी ने उन्हें बहुआयामी प्रतिभा का धनी बताया और कहा कि वे तर्क और दृढ़ संकल्प के साथ हर चुनौती का सामना करते थे।
कार्यक्रम में वरिष्ठ चित्रकार राज सैनी के संयोजन में छात्रों द्वारा बनाई गई। प्रदर्शनी भी आकर्षण का केंद्र रही। प्रदर्शनी में अटल जी के जीवन, विचारों और राजनीतिक सफर को चित्रों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में संघ रत्ना बानकर और संघमित्रा तायवाडे का शास्त्रीय नृत्य, ऋषि विश्वकर्मा और साथियों का बुंदेली लोकगायन और दीपान्वीता तथा तनिसा का समूह नृत्य विशेष सराहे गए। कार्यक्रम के संयोजक सतीश पुरोहित और नृत्यधाम संस्था की सचिव डॉ शुभश्री पटनायक ने बताया कि इस आयोजन का उद्देश्य अटल जी की स्मृतियों और उनके आदर्शों को नई पीढ़ी तक पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि अटल जी साहित्य, राजनीति और संस्कृति तीनों क्षेत्रों में अमिट छाप छोड़कर गए हैं और उनके विचार विकसित भारत की संकल्पना को मजबूत करते हैं।
