सिंहस्थ में एआई संभालेगा भीड़, मोबाइल बताएगा रास्ता

उज्जैन। सिंहस्थ 2028 को विश्वस्तरीय स्वरूप देने और करोड़ों श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रशासन अब आधुनिक तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का सहारा लेने जा रहा है।

महाकुंभ महापर्व के दौरान भीड़ नियंत्रण, यातायात प्रबंधन, सूचना प्रसारण, पार्किंग व्यवस्था और श्रद्धालुओं के आवागमन की निगरानी के लिए अत्याधुनिक डिजिटल सिस्टम विकसित किए जाएंगे। इसके लिए गूगल क्लाउड टीम और भास्कराचार्य राष्ट्रीय अंतरिक्ष अनुप्रयोग एवं जियोइन्फॉर्मेटिक्स संस्थान (बिसाग-एन) का तकनीकी सहयोग लिया जाएगा। संभागायुक्त एवं सिंहस्थ मेला अधिकारी आशीष सिंह ने सिंहस्थ 2028 के लिए विभिन्न इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं और मेला व्यवस्थाओं की प्लानिंग तथा क्रियान्वयन की प्रगति की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। सम्राट विक्रमादित्य प्रशासनिक संकुल में आयोजित बैठक में टीपी सिंह और उनकी टीम के साथ सिंहस्थ की व्यवस्थाओं को तकनीक से जोडऩे पर विस्तृत चर्चा हुई।

पीएम गति शक्ति प्लेटफॉर्म और जियोग्राफिकल स्पेशल तकनीक के उपयोग पर विचार-विमर्श किया गया। प्रशासन की योजना है कि एपीआई आधारित एक ऐसा डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित किया जाए, जहां सिंहस्थ से जुड़ी संपूर्ण जानकारी एक ही स्थान पर उपलब्ध रहे। इस प्लेटफॉर्म के माध्यम से लगभग 250 किलोमीटर की परिधि में ट्रैफिक की स्थिति, ट्रेन और बसों की आवाजाही, छोटे वाहनों के रूट, पार्किंग स्थलों, घाटों, पहुंच मार्गों और अन्य आवश्यक सुविधाओं की जानकारी रियल टाइम में प्राप्त की जा सकेगी। एआई आधारित सिस्टम भीड़ के पैटर्न का अध्ययन कर प्रशासन को पहले से अलर्ट देगा।

श्रद्धालुओं को मार्गदर्शन-डाटा आधारित निर्णय

प्रस्तुतीकरण में यह भी बताया गया कि श्रद्धालुओं के लिए मोबाइल आधारित सूचना प्रणाली विकसित की जा सकती है। इसके माध्यम से डिजिटल मैप, मार्गदर्शन, पार्किंग की उपलब्धता, भीड़ की स्थिति, घाटों तक पहुंचने के रास्ते, महत्वपूर्ण सूचनाएं और आपातकालीन संदेश सीधे मोबाइल फोन पर उपलब्ध कराए जा सकेंगे। इससे पहली बार सिंहस्थ में आने वाले श्रद्धालुओं को भी आसानी से मार्गदर्शन मिल सकेगा। प्रशासन का मानना है कि आधुनिक तकनीक के उपयोग से सिंहस्थ 2028 का संचालन अधिक व्यवस्थित, सुरक्षित और सुगम बनाया जा सकेगा। करोड़ों श्रद्धालुओं के प्रबंधन की चुनौती को देखते हुए डेटा आधारित निर्णय लेने की व्यवस्था विकसित की जा रही है, जिससे हर गतिविधि की निगरानी एकीकृत प्लेटफॉर्म से की जा सके। आशीष सिंह ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सिंहस्थ 2028 की आवश्यकताओं के अनुरूप सभी तकनीकी विकल्पों का विस्तृत अध्ययन किया जाए तथा उन क्षेत्रों की पहचान की जाए, जहां तकनीक के माध्यम से श्रद्धालुओं की सुविधा और प्रशासनिक दक्षता को अधिकतम स्तर तक बढ़ाया जा सके।

 

गूगल टीम का प्रेजेंटेशन

सिंहस्थ की तैयारियों के तहत गूगल क्लाउड टीम ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से तकनीकी प्रस्तुतीकरण भी दिया। इसमें बताया गया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा एनालिटिक्स और जियो मैपिंग तकनीक की मदद से श्रद्धालुओं की आवाजाही का रियल टाइम विश्लेषण किया जा सकता है। इससे यह पता लगाया जा सकेगा कि किस घाट, मंदिर, मार्ग या आयोजन स्थल पर कितनी भीड़ मौजूद है और अगले कुछ समय में वहां भीड़ का दबाव कितना बढ़ सकता है।

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