
जम्मू-कश्मीर में आतंकी गतिविधियों पर लगाम लगाने में मिलेगी मदद; भारत ने लगातार उठाया था मुद्दा, वैश्विक मंच पर बढ़ी स्वीकार्यता
नई दिल्ली, 18 जुलाई, 2025 – भारत के लिए यह एक बड़ी कूटनीतिक जीत है! संयुक्त राज्य अमेरिका ने पाकिस्तान स्थित आतंकवादी समूह लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के प्रॉक्सी संगठन ‘द रेसिस्टेंस फ्रंट’ (TRF) को औपचारिक रूप से आतंकवादी संगठन घोषित कर दिया है। यह कदम भारत के निरंतर प्रयासों का परिणाम है, जिसने वैश्विक मंचों पर TRF द्वारा जम्मू-कश्मीर में फैलाई जा रही हिंसा और आतंकी गतिविधियों पर लगातार चिंता व्यक्त की थी। अमेरिका का यह निर्णय TRF की आतंकी फंडिंग और गतिविधियों पर नकेल कसने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
अमेरिकी विदेश विभाग ने एक आधिकारिक बयान जारी कर TRF को एक विदेशी आतंकवादी संगठन (Foreign Terrorist Organization – FTO) के रूप में नामित किया है। इस घोषणा के बाद, अमेरिका में TRF से संबंधित किसी भी तरह की संपत्ति को जब्त कर लिया जाएगा, और अमेरिकी नागरिकों को इस संगठन के साथ किसी भी तरह के लेनदेन से प्रतिबंधित कर दिया जाएगा। TRF को जम्मू-कश्मीर में हाल के वर्षों में कई आतंकी हमलों, विशेषकर नागरिकों और सुरक्षा बलों को निशाना बनाने के लिए जिम्मेदार ठहराया गया है। यह संगठन लश्कर-ए-तैयबा के एक मुखौटे के रूप में काम करता रहा है ताकि अंतरराष्ट्रीय जांच से बचा जा सके और खुद को एक स्थानीय ‘प्रतिरोध’ समूह के रूप में पेश किया जा सके।
लश्कर-ए-तैयबा से संबंध हुए पुख्ता, अंतरराष्ट्रीय सहयोग में मजबूती; भारत की आतंकवाद विरोधी रणनीति को मिलेगा बल
अमेरिका द्वारा TRF को आतंकवादी संगठन घोषित करने से यह स्पष्ट हो गया है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय अब इस समूह के लश्कर-ए-तैयबा से गहरे संबंधों और इसकी आतंकी प्रकृति को पहचान रहा है। भारत लंबे समय से यह तर्क दे रहा था कि TRF केवल नाम बदला हुआ लश्कर है, और यह कश्मीर में आतंकवाद को बढ़ावा देने के लिए एक नया आवरण है। इस घोषणा से भारत की आतंकवाद विरोधी रणनीति को और बल मिलेगा और पाकिस्तान पर ऐसे प्रॉक्सी समूहों पर कार्रवाई करने का दबाव बढ़ेगा।
यह निर्णय आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक लड़ाई में भारत और अमेरिका के बीच बढ़ते सहयोग को भी दर्शाता है। यह दर्शाता है कि दोनों देश क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता के लिए साझा खतरों का मुकाबला करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। TRF पर यह प्रतिबंध जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा स्थिति को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है, क्योंकि इससे संगठन के लिए फंड जुटाना और अपनी गतिविधियों को अंजाम देना मुश्किल हो जाएगा। यह पाकिस्तान को भी संदेश देता है कि वह अपनी धरती से संचालित होने वाले आतंकी समूहों पर अंकुश लगाए।
