इंदौर: राजा रघुवंशी हत्याकांड में मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी शिलांग जिला जेल में 496 बंदियों में से 20वीं महिला कैदी है, जिसे जेल प्रशासन ने 24 घंटे सीसीटीवी निगरानी में रखा है. महिला बैरक में रह रही सोनम को सप्ताह में एक बार फोन कॉल की अनुमति दी गई है. अब तक वह तीन बार कॉल कर चुकी है, हालांकि उसने किससे बात की, इसका खुलासा नहीं किया है.
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, गिरफ्तारी के बाद सोनम ने पूछताछ में यह स्वीकार किया था कि उसने राज कुशवाहा के साथ मिलकर ट्रैकिंग के बहाने राजा को जंगल में ले जाकर हत्या की साजिश रची थी. फिलहाल वह और राज दोनों शिलांग जेल में न्यायिक अभिरक्षा में हैं. 4 जुलाई को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से दोनों की 14 दिन की रिमांड बढ़ाई गई थी. इधर, राजा के परिजन अब इस केस को लेकर और अधिक गंभीर हो गए हैं. भाई विपिन रघुवंशी ने शिलांग हाईकोर्ट में याचिका दायर कर सोनम, राज, और सोनम के माता-पिता व भाई के नार्को टेस्ट की मांग की है.
परिजनों का कहना है कि यह हत्या एक निजी रंजिश नहीं बल्कि योजनाबद्ध साजिश है, जिसमें कई लोग शामिल हो सकते हैं. परिवार ने दिल्ली और शिलांग के तीन वरिष्ठ वकीलों की टीम तैयार की है, जो इस कानूनी लड़ाई को हाईकोर्ट से होते हुए सुप्रीम कोर्ट तक ले जाने की तैयारी में है. उनका कहना है कि जब तक पूरी सच्चाई सामने नहीं आती, वे पीछे नहीं हटेंगे. पुलिस की एसआईटी टीम इस केस में हर एंगल से जांच कर रही है.
वहीं सोनम की अगली पेशी और नार्को टेस्ट पर न्यायालय की सुनवाई की तारीख को लेकर पुलिस और राजा के परिजन दोनों की निगाहें अब शिलांग कोर्ट पर टिकी हैं. शिलांग जेल प्रशासन ने भी इस केस की संवेदनशीलता को देखते हुए सोनम पर विशेष निगरानी रखी है. जेल के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर पुष्टि की कि सोनम को तीन बार फोन पर बात करने की इजाजत दी गई और हर बार कॉल रजिस्टर में दर्ज की गई है. इस बीच, यह सवाल लगातार गूंज रहा है कि क्या यह एक विवाहेतर संबंध से उपजी व्यक्तिगत रंजिश थी या इसके पीछे कोई बड़ा और सोचा-समझा षड्यंत्र? जवाब आने अभी बाकी है.
