इंदौर: बीस वर्ष पहले हवा बंगला क्षेत्र में राज्य शासन द्वारा माल्टियां बनाई गई और इस योजना का नाम दिया गया दिग्विजय सिंह गरीबी आवास योजना. इसमें सैकड़ों फ्लैट भी बनाए गए थे. इन सभी फ्लैटों में शहर और शहर के आसपास के निम्न एवं मजदूर परिवार को बसाया गया ताकि उनके जीवन में सुधार आए और जीवन स्तर ठीक हो सके. लेकिन कुछ ही वर्षों में नगर निगम जिला प्रशासन एवं राज्य शासन द्वारा अनदेखी की गई.
आज इन मल्टियों में कई अनियमितताएं मौजूद है. इनमें सबसे ज्यादा देखने को मिला है तो मल्टी के अंदर और चारों तरफ फैली बदबूदार गंदगी जिसमें सैकड़ो कीड़े मच्छर और विचित्र कीड़े दिखाई देते हैं, जो गंभीर बीमारियों का परिणाम बन सकते हैं. मल्टी के सीवरेज लाइन फूटी हुई है जिस कारण भी ड्रेनेज की गंदगी मल्टियों के बीच में इकट्ठी हो जाती है. आमतौर पर आम आदमी इस मल्टी के बीच में से गुजर नहीं सकता ऐसी स्थिति में मल्टी रहवासी हर दिन यहां से गुजरते हैं और इसी के बीच में रहने को मजबूर है.
इनका कहना है
यह है स्मार्ट सिटी? क्या ऐसे होते हैं सरकार के प्रोजेक्ट. हम अपने बच्चों के अच्छे भविष्य को देखकर यहां आए थे लेकिन यहां पर भी वही हालत है. यहां रहे चाहे वहां, कोई बदलाव नहीं हुआ.
सोनू यादव
मजदूर वर्ग के जीवन स्तर में सुधार लाना ही था तो उस पर बराबर ध्यान भी रखना था. मेंटेनेंस के नाम पर यहां कुछ भी नहीं है. बरसात में और दुर्दशा और मुसीबत बढ़ जाती है.
बाबू भूरिया
हर नागरिक एक समान हो यह संभव तो नहीं, लेकिन जिन प्रयासों को सफल बनाया था उसे बरकरार रखना भी जिम्मेदारी थी. बेहतर रोजगार और शिक्षित करने पर भी काम करना होगा. तभी प्रयोग सफलता पूर्ण होगा.
भारत चौहान
