
इंदौर. देश में रोज़गार दर में गिरावट आई है. पहले डिग्री वाले पढ़े लिखे युवा नौकरी के लिए परेशान होते दिखाई पड़ते थे. अब निम्न और मज़दूर वर्ग भी बेरोगारी की मार झेल रहे है. इससे युवाओं में निराशा तो है ही साथ ही आवारागिर्दी, अपराधों की ओर बढ़¸ रहे है.
शहर में बढ़ते अपराधिक घटनाओं में अधिकांश निम्न वर्ग के युवा ही दिखाई पड़ते हैं. फिर चाहे वह नशा करने वाला अपराध ही क्यों न हो. ऐसे अपराधों का एक कारण यह भी सामने आया है कि पिछले कुछ वर्षो से निम्न और मज़दूर वर्ग अपने रोज़गार को लेकर काफी चिंता में है. शहर के बड़े क्षेत्र के चौराहों पर रोज़ सुबह मज़दूर वर्ग अपने रोज़गार के लिए खड़े रहते हैं. आधा दिन बीत जाने के बाद भी उन्हें ढंग का काम नहीं मिल पाता और शाम होते ही निराशा लिए घर लौट जाते हैं. इस घटना के बीच निम्न एवं मज़दूर वर्ग के युवाओं पर बुरा असर पड़ रहा है. काम न मिलने पर वहां आवारागर्दी में पड़कर अपराधिक रास्ते की ओर बढ़ रहे हैं. यहां वर्ग भी समाज का एक हिस्सा है जिस पर बेरोज़गारी की मार बुरी तरह पड़ रही है. इसका एक कारण और भी सामने आया है कि बड़ी इमारतों और सरकारी विकास कार्य में जो मज़दूरी करने वाले होते हैं. वह ठेकेदार द्वारा दूसरे प्रदेश से लाया जाता है क्योंकि वहां सस्ती दिहाड़ी में मिल जाते है. अब प्रदेश शासन को यहां सोचना होगा कि ऐसे विकल्प निकाले जिससे मज़दूर बेरोज़गारी से उठ रही समस्याओं का निराकरण हो सकें.
इनका कहना है…
एक काम के लिए दस बज़दूर खड़े हो जाते हैं. ऐसे में काम देने वाला दिहाड़ी को सस्ती कर देता है. कुछ को काम मिलता है. कभी सभी मज़दूर खाली हाथ घर लौटते हैं. सरकार को कोई उपाय खोजना चाहिए.
– नाथू सिंह बघेला
पहले जैसा अब काम नहीं मिलता. लड़के इधर-उधर टहलते हैं. कोई नौकरी भी नहीं देता. सरकार को हमें और हमारे बच्चों के लिए कामकाज का बंदोबस्त करना चाहिए ताकि अपने परिवार का भरनण पोषण कर सकें.
– अशोक निर्गुंडे
ज़रूरत के समय पैसा और मज़दूरी नहीं होती तब ऐसे में कई युवा गलत कदम उठाते हैं. इसका निराकरण यह है कि यही के लोगों को पहले काम दिया जाए, कम पड़ने पर बाहर से मज़दूरों को बुलवाया जाए.
– गोविन्द बुधे
