
नई दिल्ली। संसद के बजट सत्र के दौरान लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर लाया गया धन्यवाद प्रस्ताव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जवाब दिए बिना ही ध्वनिमत से पारित हो गया। सदन में विपक्ष के लगातार शोर-शराबे और नारेबाज़ी के बीच स्पीकर ने प्रस्ताव को मतदान के लिए प्रस्तुत किया, जिसके बाद इसे आवाज़ मत से मंजूरी दे दी गई।
दरअसल, धन्यवाद प्रस्ताव पर हुई चर्चा का जवाब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देना प्रस्तावित था और इसके लिए 4 फरवरी की शाम 5 बजे का समय भी निर्धारित किया गया था। हालांकि विपक्षी दलों के तीखे विरोध और हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही सुचारु रूप से नहीं चल सकी और अंततः कार्यवाही को दिन भर के लिए स्थगित करना पड़ा। इस कारण प्रधानमंत्री का निर्धारित संबोधन नहीं हो पाया।
इसके बाद राजनीतिक गलियारों में यह कयास लगाए जा रहे थे कि प्रधानमंत्री अगले दिन दोपहर में लोकसभा में चर्चा का उत्तर दे सकते हैं, लेकिन सदन की परिस्थितियों और घटनाक्रम के बीच ऐसी संभावनाओं पर विराम लग गया। धन्यवाद प्रस्ताव के ध्वनिमत से पारित होने के साथ ही इस विषय पर औपचारिक प्रक्रिया पूरी हो गई, जबकि विपक्ष ने सदन की कार्यवाही के तरीके पर आपत्ति भी दर्ज कराई। इस घटनाक्रम ने संसद के मौजूदा सत्र के दौरान सरकार और विपक्ष के बीच जारी टकराव को एक बार फिर उजागर कर दिया।
