खेल मंत्रालय ने प्रस्तावित डोपिंग-विरोधी कानून संशोधनों पर हितधारकों से मांगे सुझाव

नयी दिल्ली 21 मई (वार्ता) केन्द्रीय खेल मंत्रालय ने संगठित डोपिंग गतिविधियों को अपराध घोषित करने के लिए प्रस्तावित डोपिंग-विरोधी कानून संशोधनों को सार्वजनिक परामर्श के लिए रखा गया है

इस प्रस्तावित ढांचे में प्रदर्शन-बढ़ाने वाले प्रतिबंधित पदार्थों और तरीकों की तस्करी, अवैध आपूर्ति, प्रशासन और वाणिज्यिक वितरण में शामिल बढ़ते संगठित तंत्र के खिलाफ कार्रवाई का लक्ष्य रखा गया है। संशोधनों का उद्देश्य प्रतिबंधित पदार्थों की तस्करी, अनधिकृत बिक्री और वितरण, डोपिंग के उद्देश्य से एथलीटों को प्रतिबंधित पदार्थों का सेवन कराना, नाबालिगों को प्रतिबंधित पदार्थों की आपूर्ति करना, डोपिंग से जुड़े संगठित अपराध और वाणिज्यिक गतिविधियां, निर्धारित लेबलिंग के बिना प्रतिबंधित पदार्थों की बिक्री और डोपिंग को प्रोत्साहित करने वाले विज्ञापन तथा पैसे देकर प्रचार करने जैसी गतिविधियों को अपराध घोषित करना है।

प्रावधानों का उद्देश्य डोपिंग नेटवर्क में शामिल तस्करों, अवैध आपूर्तिकर्ताओं, संगठित गिरोहों के खिलाफ कार्रवाई करना है।

महत्वपूर्ण बात यह है कि प्रस्तावित आपराधिक अपराधों जैसे तस्करी, संगठित गिरोह आदि में शामिल न पाए जाने वाले एथलीटों को केवल डोपिंग विरोधी नियमों के उल्लंघन या पॉजिटिव टेस्ट के आधार पर अपराधी नहीं ठहराया जाएगा। एथलीटों द्वारा डोपिंग विरोधी नियमों के उल्लंघन से मौजूदा डोपिंग विरोधी ढांचे के तहत ही निपटा जाएगा। इसके जरिए यह सुनिश्चित करना है कि एथलीटों को सुरक्षा मिलती रहे और खेल तथा एथलीटों का व्यावसायिक लाभ के लिए शोषण करने वाले आपराधिक गिरोहों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा सके।

यह ढांचा वैध चिकित्सीय उपयोग छूट (टीयूईएस) वाले एथलीटों और आपातकालीन चिकित्सा स्थितियों में काम करने वाले चिकित्सकों के लिए भी सुरक्षा प्रदान करता है, जिनके लिए एथलीट पर निषिद्ध पदार्थ/विधियों का वैध उपयोग आवश्यक होता है।

ये प्रस्तावित उपाय, खेल में डोपिंग के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन कन्वेंशन के तहत भारत की प्रतिबद्धताओं और विश्व डोपिंग विरोधी एजेंसी (वाडा) द्वारा समर्थित दृष्टिकोण के अनुरूप हैं। यह प्रस्तावित ढांचा खिलाड़ियों की सुरक्षा, खेल की अखंडता, सार्वजनिक स्वास्थ्य और प्रभावी क्रियान्वयन के बीच संतुलन स्थापित करने का प्रयास करता है।

हितधारक आगामी 18 जून तक प्रस्तावित संशोधनों पर अपनी टिप्पणियां और सुझाव दे सकते हैं।

 

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