गीता कपूर ने 15 साल की उम्र में शुरू किया सफर, आज करोड़ों दिलों पर करती हैं राज

गीता कपूर का एयर होस्टेस बनने का सपना कमजोर आईसाइट की वजह से अधूरा रह गया, लेकिन उन्होंने डांस को अपना करियर बनाया। कोरियोग्राफर और जज बनने तक का उनका सफर प्रेरणादायक रहा है।

हिंदी फिल्म इंडस्ट्री की मशहूर कोरियोग्राफर गीता कपूर आज किसी पहचान की मोहताज नहीं हैं। गीता कपूर आज अपना 53वां जन्मदिन मना रही है। गीता कपूर का जन्म 5 जुलाई 1973 को मुंबई के एक साधारण मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ। उनका बचपन भी एक आम लड़की की तरह ही बीता।

गीता कपूर के पिता का नाम महेंद्रनाथ कपूर और मां का नाम रानी कपूर है। बचपन में गीता का सपना एयर होस्टेस बनने का था, लेकिन कमजोर आईसाइट के कारण उनका यह सपना अधूरा रह गया। हालांकि, उन्होंने हार नहीं मानी। डांस के प्रति अपने जुनून को पहचानते हुए उन्होंने डांस क्लास जॉइन की और यही फैसला उनकी जिंदगी का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुआ।

15 साल की उम्र में शुरू किया करियर
महज 15 साल की उम्र में गीता कपूर ने मशहूर कोरियोग्राफर फराह खान की असिस्टेंट के तौर पर अपने करियर की शुरुआत की। उन्होंने फराह के साथ कई सुपरहिट फिल्मों में काम किया, जिनमें कुछ कुछ होता है, दिल तो पागल है, मोहब्बतें, कभी खुशी कभी गम, मैं हूं ना और ओम शांति ओम जैसी फिल्में शामिल हैं। बाद में उन्होंने स्वतंत्र कोरियोग्राफर के रूप में फिजा, अशोका, साथिया, हे बेबी और अलादीन जैसी फिल्मों में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया।

टीवी ने बनाया गीता मां
साल 2009 में गीता कपूर ने डांस इंडिया डांस में बतौर जज और मेंटर टीवी की दुनिया में कदम रखा। इस शो ने उन्हें घर-घर में लोकप्रिय बना दिया। इसके बाद उन्होंने ‘सुपर डांसर’, ‘इंडियाज बेस्ट डांसर’ और ‘डीआईडी लिटिल मास्टर्स’ जैसे कई बड़े डांस रियलिटी शोज में जज की भूमिका निभाई। उनका स्नेहभरा व्यवहार और प्रतिभागियों को प्रोत्साहित करने का अंदाज ही उन्हें ‘गीता मां’ के नाम से मशहूर बना गया।

आज भी डांस की दुनिया में हैं सक्रिय
52 वर्षीय गीता कपूर ने अब तक शादी नहीं की है और वह अपनी मां के साथ मुंबई में रहती हैं। अपनी साफगोई और सकारात्मक सोच के लिए पहचानी जाने वाली गीता आज भी डांस इंडस्ट्री का बड़ा नाम हैं। फिलहाल वह ‘इंडियाज बेस्ट डांसर सीजन 5’ में टेरेंस लुईस, करिश्मा कपूर और जावेद जाफरी के साथ बतौर जज नजर आ रही हैं। उनका सफर इस बात की मिसाल है कि अगर जुनून और मेहनत साथ हो तो अधूरे सपने भी नई मंजिल तक पहुंचा सकते हैं।

 

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