कैनबरा, 21 जून (वार्ता) जलवायु परिवर्तन और रहने के स्थानों में कमी के कारण समूचे विश्व में सरीसृप प्रजातियां खतरे में हैं जिसमें दक्षिण ऑस्ट्रेलिया की लुप्तप्राय पिग्मी ब्लूटंग छिपकली भी शामिल है। अब इन्हें बचाने के लिये इनका नयी जगहों पर स्थानातरंण किया जा रहा है।
दक्षिण ऑस्ट्रेलिया में फ्लिंडर्स विश्वविद्यालय की एक विज्ञप्ति के अनुसार वैज्ञानिक अब यह पता लगा रहे हैं कि बिलों में रहने वाली ‘स्किंक’ छिपकली को ठंडे, हरे-भरे वातावरण में स्थानांतरित करने से उनका भविष्य सुरक्षित हो सकता है या नहीं क्योंकि उनके पारंपरिक उत्तरी आवास गर्म और शुष्क होते जा रहे हैं।
अध्ययन में तुलना की गई है कि कैसे तीन अलग-अलग प्रकार की ‘पिग्मी ब्लूटंग’ आबादी दक्षिण ऑस्ट्रेलिया में अलग-अलग की सूक्ष्म जलवायु के अनुकूल होती है।
मूल रूप से जेम्सटाउन के पास उत्तरी फ्लिंडर्स रेंज में पायी जाने वाली इन छिपकलियों को लगभग 150 किमी दक्षिण में बुरा के पास मध्य उत्तर क्षेत्र में और दक्षिण ऑस्ट्रेलिया में टार्ली एवं कपुंडा के आसपास अधिक दक्षिणी स्थलों पर स्थानांतरित किया गया है।
इस बीच ‘बायोलॉजी’ में प्रकाशित शोध ने इनके स्थानांतरण की चुनौतियों पर प्रकाश डाला है क्योंकि छिपकलियों को नए तापमान, आर्द्रता और पानी की उपलब्धता के साथ तालमेल बिठाना पड़ता है जो उनके अस्तित्व के लिए महत्वपूर्ण कारक हैं।
फ्लिंडर्स यूनिवर्सिटी के इवोल्यूशनरी जेनेटिक्स एंड सोशलिटी लैब में पीएचडी उम्मीदवार डीन ट्रेवर्था ने कहा कि पिग्मी ब्लूटंग जैसे सरीसृप बुनियादी शारीरिक कार्यों के लिए विशिष्ट शारीरिक तापमान बनाए रखने पर बहुत अधिक निर्भर करते हैं लेकिन उच्च तापमान उनके निर्जलीकरण के जोखिम को बढ़ाता है।
उन्होंने कहा “हमें यह समझने की आवश्यकता है कि शरीर के तापमान पर अत्यधिक निर्भर यह प्रजाति इस नए वातावरण में ठंडे और अक्सर गीले मौसमों के अनुकूल कैसे बनती है।”
उन्होंने कहा कि प्रारंभिक परिणामों से पता चलता है कि अनुकूलन में दो साल से अधिक का समय लग सकता है और यह उत्पत्ति के अनुसार अलग-अलग हो सकता है। लेकिन विलुप्त होने के जोखिम को कम करने के लिए स्थानांतरण अभी भी एक आशाजनक दीर्घकालिक रणनीति प्रतीत होती है।
शोधकर्ताओं ने कहा कि ऑस्ट्रेलिया में दुनिया की सबसे अधिक सरीसृप विविधता है। इसलिए छोटे बिलों में रहने वाले सरीसृपों और अन्य एक्टोथर्म्स को जैव विविधता के नुकसान से बचाने के लिए स्थानांतरण और भी अधिक जरूरी होता जा रहा है जो शरीर के तापमान को नियंत्रित करने के लिए अपने परिवेश पर निर्भर करते हैं।
