नयी दिल्ली, 10 सितंबर (वार्ता) आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का इस्तेमाल जिस तेजी से बढ़ रहा है उसे देखते हुये दुनिया के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में इसका योगदान 15.7 लाख करोड़ डॉलर तक पहुंच सकता है।
उद्योग महासंघ फिक्की के एक कार्यक्रम में बुधवार को यहां जारी एक रिपोर्ट में यह बात कही गयी है। ‘वैश्विक एआई होड़’ पर फिक्की-बीसीजी द्वारा जारी श्वेतपत्र में एआई अपनाने के मामले में देशों के बीच बढ़ते अंतर को उजागर किया गया है और एआई को समावेशी बनाने के लिए कदम उठाने की सिफारिश की गयी है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि 66 प्रतिशत से अधिक विकसित अर्थव्यवस्थाओं के पास पहले से ही राष्ट्रीय एआई रणनीतियां हैं, जबकि विकासशील अर्थव्यवस्थाओं में यह संख्या केवल 30 प्रतिशत और सबसे कम विकसित अर्थव्यवस्थाओं में 12 प्रतिशत है। इस असंतुलन के कारण कई देशों के आयातित समाधानों पर निर्भर होने का खतरा है। उदाहरण के लिए, अमेरिका और चीन ने एआई में बढ़त हासिल की है और दुनिया के अधिकांश एआई पेशेवर इन्हीं देशों में हैं। रिपोर्ट के अनुसार, कंप्यूटिंग तक पहुंच महंगी है, प्रतिभा और वित्तपोषण सीमित हैं। हर तीन में से एक एआई विशेषज्ञ अमेरिका में है।
इसमें बताया गया है कि वित्तीय सेवाएं और खुदरा जैसे कुछ क्षेत्र डेटा समृद्ध वातावरण के कारण तेजी से एआई एकीकरण में अग्रणी हैं। वहीं, कृषि और सार्वजनिक सेवाएं जैसे सामाजिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्र निवेश पर रिटर्न (आरओआई) में अस्पष्टता के कारण खंडित बुनियादी ढांचे और वित्त पोषण की चुनौतियों के कारण पिछड़ रहे हैं। इसमें कहा गया है कि एआई अपनाने में 70 प्रतिशत बाधाएं लोगों और प्रक्रियाओं से जुड़ी समस्याओं से उत्पन्न होती हैं, न कि तकनीक से।
फिक्की की महानिदेशक ज्योति विज ने कहा, “एआई केवल एक तकनीकी लहर नहीं है; यह एक रणनीतिक होड़ है जो आने वाले दशकों में आर्थिक और सामाजिक नेतृत्व को परिभाषित करेगी। साथ मिलकर, हम यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि एआई केवल लाभ कमाने की होड़ न हो, बल्कि प्रगति की एक सामूहिक खोज हो जो दुनिया के लिए मूल्यवान हो।” बीसीजी के प्रबंध निदेशक और वरिष्ठ भागीदार सैबल चक्रवर्ती ने कहा, “हम वैश्विक एआई रेस में महत्वपूर्ण विविधता देख रहे हैं। अधिकांश विकसित अर्थव्यवस्थाओं के पास राष्ट्रीय एआई रणनीतियां हैं, जबकि कम विकसित अर्थव्यवस्थाओं को अभी यह यात्रा शुरू करनी है। वास्तविक मूल्य प्राप्त करने और वैश्विक समान विकास को गति देने के लिए हमें एआई अनुसंधान, निवेश, कौशल और नैतिकता के लिए एक मजबूत सहायक पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करना होगा।”

