अंगदान के क्षेत्र में इंदौर ने रचा एक और इतिहास, 64 वां ग्रीन कॉरिडोर बना

इंदौर. कभी-कभी किसी की विदाई भी दूसरों के जीवन में नई सुबह लेकर आती है. इंसान चला जाता है, मगर उसके अंग दूसरों के शरीर में नई रोशनी बनकर धड़कते रहते हैं. ऐसा ही एक मार्मिक और प्रेरणादायी प्रसंग इंदौर में सामने आया, जब एक परिवार ने अपार पीड़ा के बीच भी परोपकार का मार्ग चुना और अंगदान का फैसला लेकर समाज को नई दिशा दी.

उज्जैन निवासी 69 वर्षीय तुलसीराम रावल, जिन्हें ब्रेन हेमरेज के बाद उज्जैन के पाटीदार हॉस्पिटल में भर्ती किया था, वहां उपचार के दौरान ब्रेन डेड घोषित किए जाने की संभावना सामने आई. इस कठिन समय में परिवार ने स्वेच्छा से अंगदान का निर्णय लिया और मुस्कान ग्रुप के सेवादार जीतू बगानी से संपर्क किया. तुलसीराम राधास्वामी सत्संग व्यास पंथ से जुड़े हुए थे और उज्जैन डेरे में पाठी धार्मिक ग्रंथ वाचक के रूप में सेवा देते थे. गुरु प्रेरणा और संतमत के व्यवहारिक मूल्यों को आत्मसात करते हुए उनके परिजनों ने उदारता के साथ यह निर्णय लिया. इसके बाद उन्हें 16 जून को इंदौर के सीएचएल केयर हॉस्पिटल लाया गया, जहां अंगदान की प्रक्रिया शुरू हुई. शासन की गाइडलाइन अनुसार चार चिकित्सकों की टीम ने मंगलवार 17 जून को सुबह 10:35 बजे पहला और शाम 5:30 बजे दूसरा ब्रेन डेथ सर्टिफिकेशन पूर्ण किया. जिसके बाद बुधवार 18 जून की सुबह 9:00 बजे सीएचएल केयर हॉस्पिटल से चोइथराम हॉस्पिटल तक 64 वां ग्रीन कॉरिडोर बनाया. इस पुनीत कार्य में तुलसीराम के पुत्र संतोष रावल, शैलेन्द्र रावल और राजेश पेड़वा की अहम भूमिका रही. सीएचएल केयर हॉस्पिटल के डॉ सुरेंद्र सिंह परिहार और अंगदान समन्वयक श्रीमती मोनिशा बगानी ने विशेष भूमिका निभाई. वहीं मुस्कान ग्रुप से जीतू बगानी, संदीपन आर्य, लकी खत्री, जुगल नागपाल, राजेन्द्र माखीजा, जेठानंद जयसिंघानी, विशाल चंदानी, राजू धनवानी और तरुण रोचवानी ने भी समन्वय सेवा में योगदान दिया. इसके लिए सतत निगरानी सांसद शंकर लालवानी, संभाग आयुक्त दीपक सिंह, मेडिकल कॉलेज डीन डॉ अरविंद घनघेरिया और इंदौर सोसाइटी फॉर ऑर्गन डोनेशन के संस्थापक सचिव डॉ संजय दीक्षित द्वारा की गई. साथ ही, सोटो मप्र के नोडल अधिकारी डॉ मनीष पुरोहित, श्रीमती निधि शर्मा और शुभम वर्मा ने भी समन्वय में सक्रिय भागीदारी निभाई.

जीवन को मिली नई शुरुआत:

तुलसीराम की एक किडनी सीएचएल हॉस्पिटल में पंजीकृत 45 वर्षीय पुरुष को प्रत्यारोपित की. वहीं दूसरी किडनी चोइथराम हॉस्पिटल के 54 वर्षीय मरीज को दी. उनका लीवर पहले जुपिटर हॉस्पिटल के एक मरीज को आवंटित किया था, लेकिन तकनीकी कारणों से प्रत्यारोपण स्थगित करना पड़ा.

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