EOW छापा: पौधों की खरीदी में 4 करोड़ की गड़बड़ी, पाटिल के घर से नगद,गहने और प्लाट के पेपर मिले 

इंदौर. नगर निगम के सहायक उद्यान अधीक्षक चेतन पाटिल के घर मंगलवार तड़के ईओडब्ल्यू ने छापा मारा. करोड़ों की अनुपातहीन संपत्ति और पौधों की खरीदी में गड़बड़ी की जांच के तहत यह कार्रवाई की गई. छापे में पाटिल के घर से नकदी, प्लॉट के दस्तावेज, बीमा पॉलिसी और अन्य सामग्री जब्त की गई. साथ ही नगर निगम मुख्यालय के उद्यान विभाग कार्यालय से भी कई फाइलें जब्त कर कार्यालय को सील कर दिया.

नगर निगम के सहायक उद्यान अधिकारी चेतन पाटिल की मुश्किलें अब और बढ़ती दिख रही हैं. मंगलवार सुबह आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ की टीम ने उनके सुखलिया स्थित गुलमोहर कॉलोनी के घर पर छापा मारा, जहां से करीब 5 लाख रुपए नकद, 27 बीमा पॉलिसी, कई प्लॉटों के दस्तावेज, आभूषण और अन्य संदिग्ध कागजात बरामद हुए हैं. पाटिल के खिलाफ 4 करोड़ रुपए की पौधे खरीदी में गड़बड़ी की शिकायतों के आधार पर यह कार्रवाई की गई. प्राथमिक जांच में पता चला है कि नगर निगम की ओर से बड़े पैमाने पर पौधों की खरीदी में अनियमितताएं की गईं. इसके चलते पाटिल की संपत्तियों की भी जांच की जा रही है. सुखलिया और सिंगापुर टाउनशिप में दो प्लॉट और एक कृषि भूमि की रजिस्ट्री की जानकारी भी सामने आई है. छापे के बाद ईओडब्ल्यू की टीम नगर निगम मुख्यालय पहुंची और वहां उद्यान विभाग के दफ्तर की तलाशी लेकर कई फाइलें जब्त कीं. इन दस्तावेजों की पड़ताल के बाद कार्यालय को सील कर दिया. ईओडब्ल्यू के एसपी रामेश्वर यादव ने बताया कि यह कार्रवाई करोड़ों की पौधे खरीदी में भ्रष्टाचार की शिकायतों पर की गई है. जांच में सामने आया है कि पाटिल पूर्व में झोन 5 और 7 में भी पदस्थ रहे हैं और वहां भी गड़बड़ी की आशंका जताई जा रही है.

मस्टरकर्मी को बनाकर बना दिया अधिकारी!

जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि चेतन पाटिल मूल रूप से मस्टरकर्मी थे, लेकिन उन्हें कागजी प्रक्रिया के जरिए अधिकारी के रूप में स्थापित कर दिया गया. इस प्रक्रिया में भी कई गड़बड़ियां पाई जा रही हैं, जिसकी जांच की जा रही है.

पुराने विवादों से रहा है नाता

चेतन पाटिल का नाम पहले भी विवादों में रह चुका है. सबसे चर्चित मामला लॉकडाउन के दौरान का रहा, जब पूरे शहर में सार्वजनिक आयोजनों पर पाबंदी थी, तब पाटिल ने एक होटल में अपना जन्मदिन पार्टी रखी थी. इस पार्टी में निगम के अन्य अधिकारी और कई लोग शामिल हुए थे, जिनमें से अधिकांश बिना मास्क के थे. इस मामले में भी पाटिल के खिलाफ कार्रवाई हुई थी. इसके अलावा उन पर कई बार भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के आरोप लगे हैं, जिसके चलते उन्हें ट्रेंचिंग ग्राउंड जैसे गैर-महत्वपूर्ण विभागों में भी भेजा था. तत्कालीन निगमायुक्त मनीष सिंह को भी पाटिल के खिलाफ कई शिकायतें मिली थीं, जिसके चलते उन्हें महत्वपूर्ण विभागों से हटाया था. बावजूद इसके, पाटिल अलग-अलग विभागों में पदस्थ होते रहे और गड़बड़ियों का सिलसिला चलता रहा.

ईओडब्ल्यू की जांच जारी

फिलहाल चेतन पाटिल की पूरी संपत्ति, बैंक खातों, बीमा पॉलिसियों और खरीदी गई संपत्तियों की जांच की जा रही है. 4 करोड़ की पौधे खरीदी में भ्रष्टाचार की पुष्टि होने पर उनके खिलाफ आपराधिक मामला भी दर्ज किया जा सकता है. ईओडब्ल्यू की टीम ने कार्यालय से मिली फाइलों को जब्त कर दस्तावेजों की बारीकी से जांच शुरू कर दी है. नगर निगम में भ्रष्टाचार को लेकर यह कार्रवाई बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि इसमें केवल पाटिल ही नहीं, अन्य अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है.

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