मारुति सुज़ुकी के मानेसर संयंत्र में ऑटोमोबाइल इन-प्लांट रेलवे साइडिंग का संचालन शुरू

मारुति सुज़ुकी के मानेसर संयंत्र में ऑटोमोबाइल इन-प्लांट रेलवे साइडिंग का संचालन शुरू

मानेसर 17 जून (वार्ता) केंद्रीय रेल, सूचना एवं प्रसारण, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने यात्री वाहन बनाने वाली देश की सबसे बड़ी कंपनी मारुति सुज़ुकी इंडिया लिमिटेड के मानेसर संयंत्र में मंगलवार को भारत की सबसे बड़ी ऑटोमोबाइल इन-प्लांट रेलवे साइडिंग का शुभारंभ किया जहां से सालाना 4.5 लाख वाहनों को रेल के माध्यम से भेजा जा सकेगा।

इस अवसर पर कंपनी के प्रबंध निदेशक एवं सीईओ हिसाशी ताकेउचि ने कहा कि पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत पंजीकृत मानेसर रेलवे साइडिंग को हरियाणा में सोनीपत से पलवल के बीच 126 किलोमीटर लंबे हरियाणा ऑर्बिटल रेल कॉरिडोर (एचओआरसी) के हिस्से के रूप में तैयार किया गया है। एचओआरसी के पहले चरण में 5.7 किलोमीटर का ट्रैक बनाया गया है, जो मौजूदा रेल लाइन पर स्थित पटली जंक्शन को एचओआरसी पर मानसेर स्टेशन से जोड़ती है। परियोजना के हिस्से के रूप में मानेसर स्टेशन को मारूति सुजुकी के मानेसर संयंत्र की बाउंड्री से जोड़ने के लिए 1.2 किलोमीटर का एक अतिरिक्त ट्रैक बनाया गया है।

उन्होंने बताया कि इस परियोजना को संयुक्त उद्यम कंपनी हरियाणा ऑर्बिटल रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एचओआरसीएल) द्वारा क्रियान्वित किया गया है। संयुक्त उद्यम के तहत मारूति सुजुकी ने एचओआरसी के विकास में 325 करोड़ रुपये का निवेश करेगी। इसके अलावा मारूति सुजुकी ने भीतरी यार्ड के विकास के लिए लगभग 127 करोड़ रुपये का निवेश भी किया है। कुल मिलाकर, इस परियोजना में मारुति सुजुकी का कुल निवेश लगभग 452 करोड़ रुपये है।

उन्होंने कहा कि कंपनी के मानेसर प्लांट में आज भारत की सबसे बड़ी ऑटोमोबाइल इन-प्लांट रेलवे साइडिंग का उद्घाटन किया गया है। उन्होंने कहा “ हम रेल मंत्री के नेतृत्व और भारत सरकार के ग्रीन लॉजिस्टिक्स अभियान को आगे बढ़ाने वाली निर्बाध मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी के कार्यान्वयन पर ध्यान केंद्रित करने के लिए बहुत आभारी हैं। प्रधानमंत्री के गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के अनुरूप, कंपनी की दूसरी इन-प्लांट रेलवे साइडिंग फैसिलिटी इसकी ग्रीन लॉजिस्टिक्स यात्रा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि का प्रतीक है। इस परियोजना में समय पर समर्थन और मार्गदर्शन के लिए हम हरियाणा सरकार और मुख्यमंत्री के भी भारी हैं।”

उन्होंने कहा कि यह परियोजना 2070 तक भारत के नेट ज़ीरो कार्बन उत्सर्जन के प्रति कंपनी की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। यह साइडिंग 175,000 टन कार्बन उत्सर्जन को घटाने, पूरी क्षमता पर सालाना छह करोड़ लीटर ईंधन बचाने और सड़को पर बढ़ते ट्रैफिक को कम करने में योगदान देगी। कार्बन उत्सर्जन को कम करना मारुति सुज़ुकी की सर्वोच्च प्राथमिकता बनी हुई है और इसके लिए वित्त वर्ष 2030-31 तक रेलवे के ज़रिये वाहन भेजने की हिस्सेदारी को 35 प्रतिशत तक बढ़ाने का लक्ष्य है।

उन्होंने बताया कि इस साइडिंग के पूरी तरह से तैयार होने पर वार्षिक 4.5 लाख वाहनों को रेलवे के माध्यम से देश के 17 प्रमुख केन्द्रों पर पहुंचाया जायेगा और फिर से वहां से 380 शहरों में वाहनों का परिवहन किया जायेगा। कंपनी के संयंत्र के अंदर 46 एकड़ में फैली रेलवे साइडिंग में पूरी तरह से विद्युतीकृत कॉरिडोर है जिसमें रेक के लिए 4 पूरी लंबाई वाली ट्रैक और इंजन एस्केप के लिए एक ट्रैक है। कुल मिलाकर ट्रैक की लंबाई 8.2 किलोमीटर है। कंपनी द्वारा निर्यात के लिए उपयोग किए जाने वाले मुंद्रा और पीपावाव बंदरगाहों में भी यहां से रेल के माध्यम से वाहन भेजे जाएंगे।

उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष 2014-15 से कंपनी ने रेलवे के माध्यम से अब तक 25 लाख वाहन भेजे हैं। इसका ग्रीन लॉजिस्टिक्स प्रयास जलवायु संरक्षण के संयुक्त राष्ट्र सतत विकास लक्ष्य के अनुरूप हैं, जो स्वच्छ, हरित और अधिक टिकाऊ भविष्य के लिए कंपनी के दृष्टिकोण को मजबूत करता है।

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