
जबलपुर। मप्र हाईकोर्ट ने निवाड़ी जिले के पृथ्वीपुर तहसील कार्यालय में पदस्थ दो कर्मियों के नियमितिकरण संबंधी अन्य लाभ न देने के मामले को सख्ती से लिया। जस्टिस विशाल मिश्रा की एकलपीठ ने मामले में सरकार पर दस हजार रुपये की कॉस्ट लगाई है। वहीं पूर्व आदेश के परिपालन में कलेक्टर हाजिर हुए, जिन्होंने बिना शर्त माफी मांगते हुए नब्बे दिन के भीतर आवेदकों को उनका हक दिये जाने की अंडरटेकिंग दी। जिसके बाद न्यायालय ने मामले का पटाक्षेप कर दिया।
हाईकोर्ट में यह मामला पृथ्वीपुर तहसीलदार के कार्यालय में सेक्शन राइटर पद पर कार्यरत महेश कुमार कोरी और एक अन्य की ओर से दायर किया गया था। जिसमें कहा गया था कि वह पिछले तीस सालों से नियमित रूप से अपनी सेवाएं दे रहे हैं। जिस पर उन्हें शासन की नीति अनुसार कुशल श्रमिकों के बराबर का दर्जा देते हुए संबंधित सभी लाभ दिये जाये। उक्त मामले को लेकर उन्होंने कलेक्टर के समक्ष अभ्यावेदन दिया था, जिसे निरस्त कर दिया गया। मामले की सुनवाई दौरान न्यायालय ने पाया कि उक्त मामला सुप्रीम कोर्ट तक गया, जहां से सरकार की याचिका खारिज हो गई। जिस पर न्यायालय ने कलेक्टर को हाजिर होने के निर्देश दिये थे। जिस पर कलेक्टर ने बिना शर्त माफी मांगते हुए पूर्व आदेश के परिपालन में नब्बे दिनों के भीतर आवेदकों को उनका हक प्रदान किये जाने का जवाब दिया। जिसके बाद न्यायालय ने सरकार के रवैये को आड़े हाथों लेते हुए दस हजार की कॉस्ट लगाते हुए मामले का पटाक्षेप कर दिया।
