मृतकों के क्षत-विक्षत शवों के कारण डीएनए टेस्ट ही एकमात्र सहारा; कई परिवारों के पास ‘फर्स्ट डिग्री’ के नमूने देने में आ रही परेशानी, रिपोर्ट आने में लगेगा समय।
अहमदाबाद, 13 जून (वार्ता): अहमदाबाद विमान हादसे में जिन परिवारों ने अपनों को खोया है, उनके लिए दुख की इस घड़ी में एक और बड़ी चुनौती सामने आ खड़ी हुई है – मृतकों की पहचान। चूंकि दुर्घटना इतनी भीषण थी कि अधिकांश शव बुरी तरह से क्षत-विक्षत हो गए हैं और पहचानना मुश्किल हो गया है, ऐसे में डीएनए सैंपलिंग ही एकमात्र तरीका बचा है। हालांकि, इस प्रक्रिया में कई व्यावहारिक दिक्कतें आ रही हैं, जिससे परिजनों का इंतजार और पीड़ा बढ़ रही है।
बी.जे. मेडिकल कॉलेज के सिविल अस्पताल परिसर में डीएनए सैंपल कलेक्शन के लिए एक विशेष इकाई स्थापित की गई है, जहां देशभर से परिजन अपने प्रियजनों के नमूने देने के लिए पहुंच रहे हैं। अधिकारियों ने परिवारों से विशेष रूप से ‘फर्स्ट डिग्री’ के रिश्तेदारों (जैसे माता-पिता या बच्चे) के रक्त के नमूने देने का अनुरोध किया है, क्योंकि ये तुलना के लिए सबसे प्रभावी होते हैं। हालांकि, कई परिवारों के सामने यह चुनौती आ रही है कि वे तुरंत ‘फर्स्ट डिग्री’ के नमूने उपलब्ध नहीं करा पा रहे हैं, खासकर अगर परिवार के कई सदस्य एक साथ विमान में सवार थे। इसके अलावा, कुछ मामलों में, दूरदराज के इलाकों से आने वाले परिवारों को अहमदाबाद पहुंचने में भी समय लग रहा है। एक अधिकारी ने बताया कि लगभग 200 यात्रियों के लिए नमूने एकत्र किए जा चुके हैं, और नमूना संग्रह के 72 घंटों के भीतर पुष्टि आने की संभावना है, लेकिन यह इंतजार परिवारों के लिए बेहद मुश्किल भरा है।
परिजनों ने अपनी व्यथा व्यक्त करते हुए बताया कि अपनों को खोने का दर्द पहले से ही असहनीय है, और अब पहचान के लिए लंबे इंतजार ने उनकी तकलीफ और बढ़ा दी है। कई परिवार के सदस्य असहाय होकर नमूना संग्रह क्षेत्र के पास इंतजार करते हुए देखे जा रहे हैं, जबकि कुछ अन्य अपनों की खबर जानने के लिए जारी हेल्पलाइन नंबरों पर लगातार संपर्क कर रहे हैं। अधिकारियों ने बताया कि डीएनए मिलान एक वैज्ञानिक और विश्वसनीय प्रक्रिया है, लेकिन इसमें समय लगता है, खासकर जब इतने बड़े पैमाने पर नमूनों का विश्लेषण किया जा रहा हो। फॉरेंसिक टीमें रात-दिन काम कर रही हैं ताकि जल्द से जल्द पहचान प्रक्रिया पूरी की जा सके और शोक संतप्त परिवारों को उनके प्रियजनों के अवशेष सौंपे जा सकें।

