पवित्र नर्मदा में मिलने वाला गंदा पानी हुआ पीने योग्य

पर्यावरण विशेष

अज़हर खान 

जबलपुर :मांं नर्मदा आस्था का केन्द्र हैं, सांस्कृतिक और धार्मिक प्रतीक हैं, निश्चित ही हम सभी की जीवन रेखा है, जिसके बिना जीवन अधूरा है, लेकिन विडंबना ऐसी रही कि वर्षों से पवित्र नर्मदा में गंदे नालों का पानी मिल रहा था जो लोगों की भावनाएं आहत कर रहा था, जिसको लेकर कई आंदोलन भी हुए, मजबूत संकल्पों के साथ नर्मदा भक्तों ने लम्बी लड़ाई लड़ी। नर्मदा नदी में गंदा पानी मिलाने का मामला हाई कोर्ट तक पहुंचा।

नवभारत ने भी मुद्दे को न केवल प्रमुखता से उठाया बल्कि नर्मदा नदी पर मुहिम भी चलाई। जिसके बाद सन् 2024 में नगर निगम ने मां नर्मदा में मिलने वाले गंदे नालों के पानी को साफ करने के लिए सीवेज ट्रीटमेंट लगाये गए। अब जबलपुर ऐसा शहर बन गया जहाँ नर्मदा नदी का जल ए क्वालिटी का बन गया है। जिस पर पॉल्युशन कंट्रोल बोर्ड की रिपोर्ट भी मुहर लगा चुकी हैं।

ये जल अब पीने लायक बन चुका है जो गौरव एवं सौभाग्य की बात है।पिछले साल जब नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने गौरीघाट स्थित साकेत धाम में निर्मित सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का लोकार्पण किया था। तब वे मां नर्मदा के तट में लगे एसटीपी प्लांट से इतने प्रभावित हुए थे कि उन्होंने जबलपुर मॉडल पर पूरे प्रदेश में एसटीपी लगाने की घोषणा की थी, ताकि मॉं नर्मदा एवं अन्य नदियों में गंदे नालों का पानी नहीं मिल पाए।
यहां लगे हैं 45 करोड़ से संयंत्र-
जिन नालों में संयंत्र लगाये गए हैं उसमें गौर पुल के पास दो नाले, बबहा नाला जो कालीघाट में मिलता है वहां भी लगाये गए हैं। इसके अलावा सिद्धघाट, बाबाश्री आशाराम के पीछे का नाला, खारीघाट के पास का नाला, खंदारी-शाहनाला, जो तिलवारा में मिलता है, इसमें भी संयत्र लगाए गए। इसी प्रकार जैन गौशाला के पास का नाला, जमतरा के पास संयंत्र लगे हैं। ये संयंत्र करीब 45 करोड़ की लागत से लगे है। इन नालों में पहले घरों, डेरियां, कॉलोनियों आदि का गंदा पानी नर्मदा में मिलता था।
महापौर ने नर्मदा जल पीकर दिखाया था
मां नर्मदा के तट पर लगे सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से साफ जल को महापौर जगत बहादुर सिंह अन्नू ने पिया था और कहा था कि जनता को यह विश्वास दिलाना जरूरी है कि एसटीपी से साफ हो रहा पानी पूरी तरह लैब की रिर्पोट के मुताबिक भी पीने योग्य है। उनका ये भी कहना रहा कि मांं नर्मदा में गंदा पानी नहीं मिलना संस्कारधानी के लिए गर्व की बात है।
रेत माफिया, गंदगी करने वाले कब समझेंगे
नदी से रेत उत्खनन पर रोक नहीं लग पा रही है। मां नर्मदा का आंचल रेत माफिया छलनी कर रहे हैं। नर्मदा के तटों को कुछ लोग प्रदूषित भी करते है। गदंगी करते हैं, कुछ श्रद्धालु कचरा पूजन सामग्री फेंक कर चले जाते हैं। नर्मदा किनारे निस्तार करने से भी कुछ लोग नहीं चूकते। अभी कुछ छोटे नालों से भी निस्तार का पानी नर्मदामें प्रवाहित हो रहा है, जिसे रोकने के लिए प्रयास जारी हैं। मां नर्मदा का महत्व समझने की आवश्यकता नहीं हैं, शासन प्रशासन मां नर्मदा को स्वच्छ रखने में कोई कसर नहीं छोड़ रहा है, लेकिन ऐसे लोग न जाने कब मां नर्मदा का महत्व समझेंगे, ये समझ से परे हैं।
इनका कहना हैं
संस्कारधानी की नर्मदा का जल ए प्लस क्वालिटी का हैं। ट्रीटमेंट प्लांट लगने से मां नर्मदा में अब गंदे नालों का पानी नहीं मिल रहा हैं जो हम सबके लिए गौरव की बात हैं। भविष्य में अगर कोई छोटे नाले-नालियां नर्मदा में मिलते हैं तो इसे कंट्रोल करने के लिए भी तैयारी कर ली गई हैं। दस करोड़ की राशि से और ट्रीटमेंट प्लांट लगाने की योजना बनाई गई हैं।
जगत बहादुर सिंह, (अन्नू), महापौर
नर्मदा नदी में मिलने वाले गंदे नालोंं पर सात सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट लगा दिए गए हैं। अब नर्मदा में गंदा पानी नहीं मिल रहा हैं।
कमलेश श्रीवास्तव, कार्यपालन यंत्री, ननि

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