
नयी दिल्ली 03 जून (वार्ता) राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने मंगलवार को यहां सभी सात मानद सदस्य आयोगों और दिव्यांगों के लिए मुख्य आयुक्त की वैधानिक पूर्ण आयोग बैठक आयोजित की।
यह बैठक देश में मानवाधिकारों को बढ़ावा देने और उनकी रक्षा करने के लिए आयोगों के बीच सहयोगात्मक प्रयासों के लिए नई प्रतिबद्धता के साथ संपन्न हुई। बैठक का उद्देश्य मानवाधिकारों को बढ़ावा देने और उनकी रक्षा करने के लिए आयोगों के बीच तालमेल एवं सहयोग को बढ़ाना था।
बैठक की अध्यक्षता करते हुए एनएचआरसी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) वी. रामसुब्रमण्यम ने आयोगों के बीच सहयोगात्मक कामकाज के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने नियमित अंतराल पर वैधानिक पूर्ण आयोग के सदस्यों की संयुक्त बैठकें आयोजित करने और मामलों के दोहराव से बचने के लिए सभी आयोगों की वेबसाइटों को हाइपरलिंक करने के लिए एक तंत्र बनाने का सुझाव दिया।
बैठक में विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की गई जिसमें कमजोर और हाशिए पर पड़े वर्गों के अधिकारों की सुरक्षा, सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करना और मामलों के दोहराव को कम करना शामिल है। प्रतिभागियों ने संयुक्त तथ्य-खोज मिशन, जागरूकता अभियान और आउटरीच कार्यक्रमों की आवश्यकता पर जोर दिया।
राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (एनसीएससी) के अध्यक्ष किशोर मकवाना ने अनुसूचित जाति समुदायों के अधिकारों और कल्याण के लिए आयोग द्वारा उठाए गए सक्रिय कदमों के बारे में बताया।
राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) की अध्यक्ष विजया रहाटकर ने कहा कि एनसीडब्ल्यू महिलाओं के कल्याण के लिए शिकायत, अनुसंधान, जागरूकता और आउटरीच प्रशिक्षण कार्यक्रमों पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।
राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) की अध्यक्ष तृप्ति गुरहा ने बाल तस्करी को रोकने और पोस्को मामलों में तेजी से कानूनी उपाय सुनिश्चित करने के लिए जागरूकता अभियान चलाने पर जोर दिया।
इस अवसर पर राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के सदस्य निरुपम चकमा, विकलांग व्यक्तियों के आयोग के मुख्य आयुक्त राजेश अग्रवाल और राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग का प्रतिनिधित्व करने वाले डैनियल ई. रिचर्ड्स ने भी अपने दृष्टिकोण साझा किए तथा कमजोर समुदायों के मानवाधिकार मुद्दों के समाधान के लिए क्षेत्रीय आयोगों के बीच एक संयुक्त तंत्र की आवश्यकता पर जोर दिया।
एनएचआरसी के सदस्य न्यायमूर्ति (सेनि) विद्युत रंजन सारंगी ने यह सुनिश्चित करने के महत्व पर जोर दिया कि कल्याणकारी योजनाएं हाशिए पर पड़े लोगों सहित समाज के सभी वर्गों तक पहुंचे।
एनएचआरसी की एक अन्य सदस्य विजया भारती सयानी ने टिप्पणी की कि ये आयोग अलग-थलग संस्थाएं नहीं हैं बल्कि मानवाधिकारों को बढ़ावा देने और उनकी रक्षा करने की दिशा में काम करने वाले सह-यात्री हैं।
इससे पहले बैठक के लिए एजेंडा निर्धारित करते हुए एनएचआरसी के महासचिव भरत लाल ने देश के अद्वितीय संस्थागत मानवाधिकार संरक्षण ढांचे का अवलोकन किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इन संस्थाओं के बीच इस तरह की बातचीत मानवाधिकारों के प्रमुख मुद्दों पर एक साझा मंच बनाने और पीड़ितों को सामूहिक रूप से त्वरित राहत सुनिश्चित करने में उपयोगी है।
