119 साल बाद भी सहेजकर रखा गया ब्रिटिश कालीन भाप इंजन

जबलपुर: ब्रिटिश काल की याद दिलाता हुआ सन् 1906 में निर्मित भाप इंजन आज भी करीब 119 साल बाद भी शहर में सहेजकर रखा गया है जिसे देखने के बाद ब्रिटिश काल की याद आना बिल्कुल तय है। जी हां.. हम बात कर रहे हैं मार्शल संस एंड कंपनी के द्वारा बनाए गए भाप इंजन की जो कि आज भी पचपेढ़ी में रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय से रिज रोड जाने वाले मार्ग पर एक प्लेटफॉर्म पर भाप इंजन को रखा गया है जिसे पोर्टेबल नाम दिया गया था।

मार्शल एंड संस ऑफ गेन्सबोरो, लिंकनशायर यूनाइटेड किंगडम ने इस पोर्टेबल स्टीम इंजन का निर्माण किया था। यह भाप इंजन सड़क पर चलता था और इसमें ट्राली लगा कर सामान ढोया जाता था। इससे तोप भी खींचकर यहां से वहां ले जाई जाती थी। खास तौर पर कृषि कार्यों के लिए भी भाप इंजन का ही उपयोग होता था। 1906 में निर्मित इस इंजन को पोर्टेबल कहा जाता था.

क्योंकि इसे ट्रैक्शन इंजन द्वारा कार्यस्थलों पर ले जाया जा सकता था। इस भाप इंजन में लोहे के चक्के थे। टायर आ जाने के बाद चक्कों पर टायर चढ़ाए गए थे। आपको बता दें कि जबलपुर में भी ब्रिटिश सेना और गैरिसर इंजीनियर इस पोर्टेबल का उपयोग बहुउद्देश्शीय कार्यों के लिए किया करते थे। ब्रिटिश कालीन भाप इंजन को देखने व निहारने शहरवासी अधिकतर रविवार के दिन पचपेढ़ी जाते हैं।

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