नयी दिल्ली, (वार्ता) वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय की एजेंसी विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) ने मूल्यवर्धित चमड़ा उत्पादों के निर्यात पर लागू प्रमुख प्रक्रियात्मक प्रतिबंधों को हटा दिया है।
डीजीएफटी ने इस संबंध में सोमवार को अधिसूचना संख्या 15/2025-26 जारी की।
मंत्रालय ने एक विज्ञप्ति में कहा है कि इस कदम से चमड़ा निर्यातकों पर अनुपालन बोझ कम होने और निर्यातकों के लिए व्यापार करने में आसानी होने की उम्मीद है। डीजीएफटी ने चमड़े के निर्यात के सम्बन्ध में बंदरगाहों पर लगे प्रतिबंध हटा दिए गए हैं, जिससे किसी भी बंदरगाह या अंतर्देशीय कंटेनर डिपो (आईसीडी) से तैयार चमड़ा, वेट ब्लू लेदर और ईआई टैन्ड लेदर के निर्यात की अनुमति मिल गई है। इससे पहले, ये निर्यात केवल विनिर्दिष्ट एवं अधिसूचित बंदरगाहों के रास्ते ही किया जा सकते थे।
सरकार ने तैयार चमड़ा, वेट ब्लू लेदर, क्रस्ट लेदर और ईआई टैन्ड लेदर के निर्यात के लिए केंद्रीय चमड़ा अनुसंधान संस्थान (सीएलआरआई) द्वारा परीक्षण और प्रमाणन की अनिवार्य आवश्यकता को भी समाप्त कर दिया है। ये प्रक्रियाएं मूल रूप से मूल्य-वर्धित चमड़े के उत्पादों के निर्यात की निगरानी करने और उन्हें कच्चे चमड़े और शुल्क योग्य वस्तुओं से अलग करने के लिए स्थापित की गई थीं पर ऐसी श्रेणियों के चमड़ा उत्पाद पर निर्यात शुल्क हटाने और प्रसंस्कृत और कच्चे चमड़े के बीच स्पष्ट भौतिक अंतर के साथ, ऐसी जांच का कोई अर्थ नहीं बचा था ।
सरकार ने कहा है कि यह निर्णय चमड़ा निर्यात परिषद, चमड़ा निर्यातकों और केंद्रीय चमड़ा अनुसंधान संस्थान (सीएलआरआई) सहित हितधारकों के साथ परामर्श के बाद लिया गया है। इससे निर्यात प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करने, लेन-देन की लागत को कम करने और विशेष रूप से एमएसएमई निर्यातकों को लाभ मिलने की उम्मीद है।
विज्ञप्ति में कहा गया है कि ये निर्णय सामान्य सीमा शुल्क प्रावधानों के तहत पारदर्शिता और गुणवत्ता मानकों को बनाए रखते हुए वैश्विक चमड़ा मूल्य श्रृंखला में निर्यात प्रतिस्पर्धा क्षमता बढ़ाने के प्रयासों को बल प्रदान करने वाले हैं।
