कांग्रेस के कूचे से बाहर हुए कृष्णराव

ग्वालियर चंबल डायरी

अंततः ग्वालियर कांग्रेस ने नगर निगम के पूर्व नेता प्रतिपक्ष कृष्णराव दीक्षित को पार्टी से निष्कासित कर बाहर का रास्ता दिखा दिया। यह सच है कि दीक्षित लंबे समय से भाजपा के संपर्क हैं। उनका भगवा धारण करना तय है, बस जगह और तारीख तय होने की देर है। उनकी बगावत की खबरें कांग्रेस दफ्तर तक पहुंच रही थीं लेकिन अनुशासनहीनता के पुख्ता सबूतों के अभाव में उनके खिलाफ कार्यवाई टलती रही। अभी हाल में उनका एक इंटरव्यू छपा था जिसमें उन्होंने कांग्रेस की रीति नीति और विचारधारा के खिलाफ तमाम टिप्पणियां की थीं।

उन्हें पार्टी से निष्काशित करने के सही मौके की बाट जोह रही अनुशासन समिति को मुफीद मौका मिल गया और कभी ग्वालियर निगम परिषद में कांग्रेस का चेहरा माने जाने वाले दीक्षित पर अनुशासन का डंडा चल गया। दीक्षित कम उम्र में ही तीन दफा पार्षद रहने के अलावा लंबे समय तक ग्वालियर निगम में विपक्ष के नेता भी रहे। उन पर कांग्रेस के तमाम बड़े नेताओं का आशीर्वाद रहा और इसी के चलते वे पार्टी में पद प्रतिष्ठा पाते रहे लेकिन इन दिनों वे पार्टी में हाशिए पर थे।

दरअसल, कांग्रेस अनुशासन समिति ने दीक्षित को भेजे नोटिस में कहा था कि उनके साक्षात्कार एवं साक्षात्कार के ऑडियो को कांग्रेस अनुशासन समिति ने पढ़ा एवं ऑडियो सुना जिसमें कहा गया कि कांग्रेस पर कम्युनिस्ट विचारधारा हावी हो गई है और कांग्रेस अपनी विचारधारा से भटक गई है, कांग्रेस के शहर सदर देवेंद्र शर्मा का कहना है कि दीक्षित द्वारा न सिर्फ साम्प्रदायिक ताकतों को समाज व राष्ट्र के हित में बताया गया बल्कि कांग्रेस के नीतिगत निर्णय जो वफ्फ बोर्ड के सबंध में लिया गया था, उसका भी उनके द्वारा विरोध किया गया। उनके द्वारा अपनी बात पार्टी मंच पर न रखते हुए इस तरह का साक्षात्कार देना कांग्रेस संविधान के अनुसार अनुशासनहीनता की परिधि में आता है। पता चला है कि दीक्षित को भाजपा में सम्मानजनक पद दिए जाने का भरोसा मिला है और ग्वालियर निगम में उनके अनुभवों का लाभ उठाया जाएगा। इस बात में कोई शक नहीं कि दीक्षित की निगम एक्ट पर खासी पकड़ है और एक वक्त कांग्रेसी महापौर के भी वे अघोषित सलाहकार रहे।

विजय शाह से इसलिए नाराज है चंबल की जनता

पहलगाम हमले के बाद हमारी सेनाओं ने जिस बहादुरी के साथ ऑपरेशन सिंदूर को अंजाम दिया और आतंकियों के अड्डे तहस नहस करने के साथ ही दुश्मन को जिस तरह नाकों तले चने चबाने के लिए मजबूर कर दिया, उससे प्रत्येक देशवासी गौरवान्वित है। खास बात यह है कि इस पूरे अभियान के दौरान देशवासियों ने धर्म, जाति और समाज की सीमाओं से ऊपर उठकर कौमी एकजुटता का परिचय दिया लेकिन कुंवर विजय शाह जैसे मंत्रियों की बदजुबानी देश में बने इस एकता एवं सदभावना के माहौल को प्रभावित करती है। हमारी सेना पाक की तरह मजहबी सेना न होकर पूर्णत: धर्मनिरपेक्ष सेना है लेकिन मंत्री विजय शाह ने जिस तरह कर्नल सोफिया कुरैशी के बारे में अत्यंत अपमानजनक टिप्पणी की है, उससे ग्वालियर चंबल और बुंदेलखंड का जनमानस खासा नाराज है।

यहां नाराजगी इसलिए और ज्यादा है क्योंकि कर्नल सोफिया कुरैशी बुंदेलखंड की ही रहने वालीं हैं। उनका परिवार ग्वालियर से सवासौ किमी दूर स्थित झांसी में निवास करता है। ग्वालियर में भी उनके कई परिजन निवास करते हैं। ऑपरेशन सिंदूर के बाद झांसी में उनके निवास पर जमकर जश्न भी मना था। बहरहाल, आज दिनभर ग्वालियर में मंत्री विजय शाह के पुतले फूंके जाते रहे। ग्वालियर में कांग्रेस मंत्रिमंडल से उनकी बर्खास्तगी की मांग कर रही है। हालांकि विजय शाह प्रदेश भाजपा मुख्यालय में जाकर माफी की फरियाद कर आए हैं लेकिन उनकी कुर्सी पर खतरा बरकरार है। यह प्रसंग उन बड़बोले नेताओं के लिए भी करारा सबक है जो राष्ट्रहित के आंकलन पर भी धर्म और जाति का मुलम्मा चढ़ा देते हैं।

बेनूर हुए मेला परिसर में फिर से रौनक

एक वक्त लगा था कि ग्वालियर मेला परिसर में लग रहा समर नाइट मेला भारत पाक तनाव की भेंट चढ़ सकता है लेकिन सीजफायर के बाद मेला के इन दुकानदारों ने राहत की सांस ली। समर नाइट मेला का आगाज हो गया है जो पूरे दो महीने चलेगा। दिसंबर जनवरी का मेला खत्म होने के बाद बेनूर हुए ग्वालियर मेला परिसर में फिर से रौनक का आलम है।

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