महाकौशल की डायरी
अविनाश दीक्षित
सिवनी और शहडोल जिलों के भाजपाध्यक्ष इन दिनों खासे चर्चाओं में हैं, ध्यान रखने वाली बात यह है कि दोनों ही जिलों में भाजपा ने महिलाओं को कमान सौंप रखी है। सिवनी में चर्चाओं का बाजार इसलिए सरगर्म है क्योंकि वहां 5 मंडल अध्यक्षों की नियुक्ति की सूची वायरल हो गई लेकिन चंद घंटों बाद सूची रोकने का निर्णय भी लेना पड़ गया। बात शहडोल जिले की करें तो यहां एक महीने से भी ज्यादा समय से एक बावड़ी को लेकर भाजपा जिलाध्यक्ष का परिवार लोगों के निशाने पर हैं।
सिवनी में भाजपा संगठन की कमान मीना बिसेन संभाल रहीं हैं।
हाल ही में सिवनी विधानसभा के 5 मंडल अध्यक्षों की सूची भाजपा की ओर से जारी की गई, जिसमें शंकरलाल उट्टी, जयदीप सिंह ठाकुर, रामजी चंद्रवंशी, युवराज सिंह राहंगडाले और अभिषेक दुबे के नाम शामिल थे। सूची मीडिया तक पहुंचा दी गई लेकिन कुछ घंटे बाद ही भाजपा जिला संगठन की ओर से संपर्क कर आग्रह किया गया कि इस सूची को प्रकाशित न किया जाए। पूछे जाने पर वजह बताई गई कि प्रदेश संगठन की अनुमति प्राप्त नहीं हुई है। दिलचस्प बात यह है कि सूची जारी करते समय जाहिर किया गया था कि प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा की सहमति जिला भाजपा अध्यक्ष मीना बिसेन ने प्राप्त की है।
भाजपा जैसी अनुशासित पार्टी में कुछ घंटों में फैसले बदलने की रवायत अमूमन कम ही देखने सुनने को मिलती है, मगर सिवनी में जो हुआ उसको लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह निर्णय भाजपा की आंतरिक कलह का प्रतिबिंब है जो यह भी दर्शाता है कि संगठन के अंदर समन्वयहीनता किस कदर बढ़ी हुई है। जानकारों के अनुसार ऐसा पहली नहीं बार हुआ है जब नियुक्तियों को लेकर सिवनी में विवाद की स्थिति बनी है। पार्टी के पूर्व जिलाध्यक्ष आलोक दुबे के कार्यकाल में भी नियुक्तियों को लेकर विरोध प्रदर्शन हुआ था।
सवाल यह है कि कैडरबेस पार्टी में जहां सबसे पहले अनुशासन का पाठ ही पढ़ाया जाता है और कोई भी जानकारी सार्वजनिक करने से पूर्व गहन मंथन किया जाता है, सामूहिक सहमति के जतन होते हैं, उस दल में ऐसी चूक क्या संभव है? बहरहाल सिवनी के इस मामले में प्रादेशिक नेतृत्व की ओर से क्या नसीहत दी जाएगी, इसका पता भविष्य में चलेगा किंतु चर्चा है कि कुछ नामों को लेकर संगठन के अंदर ही विरोध चल रहा था जिसे अंतिम क्षणों तक दबाने के प्रयास होते रहे, इन स्थितियों के बीच भी जब सूची जारी हुई तो आंतरिक रूप से विरोध और भी गहरा गया। मजबूरन कदम पीछे खींचते हुए मीडिया से समाचार प्रकाशित न करने का आग्रह करना पड़ गया।
बावड़ी विवाद बनाम सियासी द्वंद ….
शहडोल जिले में काफी दिनों से भाजपाई गलियारों में एक अलग तरह की सियासत चल रही है। आमतौर पर विवादों से दूर रहने वाली भाजपा जिलाध्यक्ष अमिता चपरा अप्रत्यक्ष तौर पर अपनी ही पार्टी नेताओं के निशाने पर हैं। दरअसल जिले के किरण टॉकीज स्थित एक बावड़ी है जिस पर अवैध कब्जा होने की चर्चाएं खूब हो रहीं हैं। आरोप लगाए जा रहे हैं कि बावड़ी पर चपरा परिवार ने अवैधानिक कब्जा कर लिया है। यह बात किस हद तक सही है, उसकी वास्तविकता तो जिला प्रशासन ही जानता होगा, लेकिन जिस तरह अमिता चपरा का नाम इस मामले से जोड़ा जा रहा है उससे उनकी छवि तो धूमिल हो रही है बल्कि यह भी संकेत मिल रहे हैं कि जिला भाजपा में गुटबाजी कितनी तेजी से बढ़ रही है। यह भी स्पष्ट हो रहा है कि अलग -अलग धड़े अपने-अपने निहितार्थ के लिए पार्टी के मूल सिद्धांतों की अपरोक्ष रूप से कितनी अनदेखी कर रहे हैं।
