मुंबई, (वार्ता) ओमनीसाइंस कैपिटल की मंगलवार को जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में औद्योगिक क्षेत्र का हिस्सा वर्तमान 27.3 प्रतिशत से बढ़ कर 2035 तक 30-32 प्रतिशत तक जा सकता है।
रिपोर्ट के अनुसार एक दशक में देश के औद्योगिक क्षेत्र में तीन लाख करोड़ डॉलर के कारोबार के अवसर उत्पन्न हो सकता हैं जो अभी एक लाख करोड़ डॉलर के बराबर है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि 2035 तक भारतीय अर्थव्यवस्था 10 लाख करोड़ डॉलर की होगी जिसमें औद्योगिक क्षेत्र का हिस्सा तीन लाख करोड़ डालर से अधिक होगा। उद्योग क्षेत्र के हिस्से में इस विस्तार में विनिर्माण क्षेत्र की भूमिका बड़ी होने की संभावना है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत का उद्योग क्षेत्र 2035 तक जीडीपी में कृषि से आगे निकलकर संभावित 30-32 प्रतिशत तक योगदान कर रहा होगा इसमें मुख्य भूमिका विनिर्माण क्षेत्र की होगी।
रिपोर्ट के अनुसार पिछले पांच वर्षों में औद्योगिक क्षेत्र की वृद्धि में निर्माण क्षेत्र की भूमिका अग्रणी रही है। यह बुनियादी ढांचे में महत्वपूर्ण निवेश से संचालित है। विनिर्माण क्षेत्र का हिस्सा 2035 तक औद्योगिक क्षेत्र में दो तिहाई तक पहुंच जाएगा और जीडीपी में विनिर्माण क्षेत्र की हिस्सेदारी 20 प्रतिशत तक पहुंच सकती है।
रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2030 तक एक लाख करोड़ के निर्यात के लक्ष्य से देश में प्रति व्यक्ति आय और घरेलू खपत में सुधार होने की उम्मीद है।
ओमनीसाइंस कैपिटल का यह भी मानना है कि इस निर्यात-लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए, व्यापारिक निर्यात को मौजूदा 45000 करोड़ डॉलर से बढ़ाकर एक लाख करेाड़ डालर करना होगा और जिसके लिए इसमें साल-दर-साल 12 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि की आवश्यकता होगी।
ओमनीसाइंस कैपिटल में ईवीपी और पोर्टफोलियो मैनेजर अश्विनी शमी ने कहा है कि कच्चे माल की उपलब्धता, कम श्रम लागत, विनिर्माण के लिए अनुकूल कॉर्पोरेट कर दर और प्रोत्साहनों के माध्यम से सक्रिय सरकारी समर्थन के कारण भारत विनिर्माण निवेश के लिए एक पसंदीदा गंतव्य के रूप में उभरना जारी रखेगा।
