जिंदल स्टेनलेस का अंतिम तिमाही में शुद्ध लाभ 94.32 प्रतिशत बढ़ा

नयी दिल्ली 08 मई (वार्ता) स्टेनलेस स्टील क्षेत्र की देश की सबसे बड़ी कंपनी जिंदल स्टेनलेस लिमिटेड (जेएसएल) ने वित्त वर्ष 2024-25 की अंतिम तिमाही में 925 करोड़ रुपये का एकल शुद्ध लाभ कमाया है जो इससे पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि के 476 करोड़ रुपये की तुलना में 94.32 प्रतिशत अधिक है।

कंपनी के निदेशक मंडल की बैठक के बाद उसके प्रबंध निदेशक अभ्युदय जिंदल ने कहा कि मार्च 2025 में समाप्त तिमाही में कंपनी का राजस्व 10786 करोड़ रुपये रहा है जो मार्च 2024 में समाप्त तिमाही के 9521 करोड़ रुपये के राजस्व की तुलना में 13.28 प्रतिशत अधिक है। उन्होंने कहा कि मार्च 2025 में समाप्त वित्त वर्ष में कंपनी का एकल शुद्ध लाभ 2711 करोड़ रुपये रहा है जो इससे पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि के 2531 करोड़ रुपये की तुलना में 7.12 प्रतिशत अधिक है। वित्त वर्ष 2024-25 में समाप्त वित्त वर्ष में कुल राजस्व 40182 करोड़ रुपये रहा है जो इससे पिछले वित्त वर्ष के 38356 करोड़ रुपये के राजस्व की तुलना में 4.76 प्रतिशत अधिक है।

श्री जिंदल ने कहा “पिछला वित्तीय वर्ष हमारे लिए एक अहम साल रहा, जिसने हमारे घरेलू बाज़ार में मज़बूत स्थिति बनाने और हमारी आपूर्ति श्रृंखला को बेहतर बनाने के लक्ष्य को पूरा किया। इंडोनेशिया में हमारी एनपीआई सुविधा का जल्दी चालू होना, क्रोमेनी स्टील्स का पूरी तरह अधिग्रहण करना और एम1एक्सचेंज में हमारा निवेश, इन सभी ने हमारे व्यापार को मज़बूत किया है। एम1 एक्सचेंज में हिस्सेदारी ने कच्चे माल की सुरक्षा, उत्पादों में विविधता और डिजिटल नेतृत्व में एक बड़ा कदम उठाने में मदद की। जैसे-जैसे हम ग्रीन हाइड्रोजन का इस्तेमाल बढ़ाते हैं, नए उत्पादों और ग्रेड का निर्माण करते हैं, अक्षय ऊर्जा की आपूर्ति बढ़ाते हैं और पारदर्शी ईएसजी रिपोर्टिंग करते हैं, हम सिर्फ स्टेनलेस स्टील बनाने पर नहीं, बल्कि भारत के लिए एक तकनीक-सक्षम और आत्मनिर्भर भविष्य बनाने की ओर अग्रसर हो रहे हैं।”

कंपनी के निदेशक मंडल ने वित्त वर्ष 2025 के लिए अंतिम लाभांश के रूप में प्रति शेयर दो रुपये का प्रस्ताव किया गया है जो शेयरधारकों की मंजूरी पर निर्भर है। इसके साथ कुल लाभांश भुगतान बढ़कर तीन रुपये हो गया है जो दो रुपये अंकित मूल्य वाले शेयर पर 150 प्रतिशत लाभांश। 31 मार्च 2025 को समाप्त तिथि तक कंपनी का शुद्ध ऋण 3,899 करोड़ रुपये रहा। पूंजीगत व्यय से भरपूर वर्ष होने के बावजूद, समेकित शुद्ध ऋण-से-इक्विटी अनुपात लगभग 0.2 पर बना रहा।

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