नयी दिल्ली, 06 मई (वार्ता) दिल्ली प्रदेश भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) मोर्चा ने मोदी सरकार की ओर से जाति आधारित जनगणना के निर्णय का स्वागत करने के लिए मंगलवार को समारोह का आयोजन किया और मिठाई बांटकर खुशी का इजहार किया।
दिल्ली भाजपा के ओबीसी मोर्चा के अध्यक्ष सुनील यादव के नेतृत्व में यहां कनॉट पैलेस में आयोजित धन्यवाद कार्यक्रम में मोर्चा के महामंत्री रामखिलाड़ी यादव और अन्य पदाधिकारी मौजूद थे। इस मौके पर श्री यादव ने कहा कि भाजपा जाति या धर्म के आधार पर समाज को बांटने में विश्वास नहीं रखती है। उन्होंने कहा कि यह जाति आधारित जनगणना इसलिए आवश्यक हो गई, क्योंकि यह देखा जा रहा है कि स्वतंत्रता के 78 वर्षों बाद भी बड़ी संख्या में लोग समावेशी विकास के दायरे से बाहर हैं।
उन्होंने कहा कि मोदी सरकार का जातिगत जनगणना पर ऐतिहासिक निर्णय और कांग्रेस की दोहरी नीति को उजागर करना, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अगुवाई में केंद्रीय मंत्रिमंडल का एक महत्वपूर्ण फैसला है। यह साहसी और पारदर्शी कदम सामाजिक न्याय, तथ्यों पर आधारित नीति निर्माण और भारत के सामाजिक ताने-बाने को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
उन्होंने कहा कि 94 वर्षों के बाद इस प्रक्रिया को पुनर्जीवित करने का मोदी सरकार का निर्णय साक्ष्य-आधारित शासन और पारदर्शिता के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि दशकों की राजनीतिक अवसरवादिता को उजागर करते हुए यह बताना आवश्यक है कि कांग्रेस पार्टी और उसके सहयोगियों की जातिगत जनगणना के मुद्दे पर दोहरी नीति रही है। विपक्ष में रहते हुए कांग्रेस ने जातिगत जनगणना की मांग को एक राजनीतिक नारे की तरह उपयोग किया और इसे घोषणापत्रों और जनसभाओं में शामिल किया।
उन्होंने कहा कि सत्ता में रहने पर कांग्रेस सरकारें इसे लागू करने में लगातार विफल रहीं। वर्ष 2010 में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) के तहत मंत्रियों का एक समूह गठित हुआ, लेकिन कांग्रेस सरकार ने पारदर्शी गणना के बजाय केवल एक सर्वेक्षण कराया। सामाजिक, आर्थिक एवं जाति आधारित जनगणना (एसईसीसी) के आंकड़े कभी पूरी तरह जारी नहीं किए गए और यह प्रक्रिया अस्पष्टता और अपारदर्शिता से ग्रस्त रही।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस और उसके सहयोगी जातिगत जनगणना को केवल एक राजनीतिक उपकरण की तरह उपयोग करते रहे हैं, जबकि उनके पास कभी भी वास्तव में वंचित वर्गों की भलाई की मंशा नहीं रही।
इसके विपरीत मोदी सरकार सुनिश्चित कर रही है कि जातिगत गणना को एक संगठित, पारदर्शी और कानूनी रूप से मजबूत प्रक्रिया के तहत आधिकारिक जनगणना का हिस्सा बनाया जाए, न कि बिखरे हुए और संदिग्ध राज्य स्तरीय सर्वेक्षणों के माध्यम से।
श्री यादव ने कहा, “कांग्रेस की तरह नहीं, जिसने आधे-अधूरे, राजनीतिक रूप से प्रेरित सर्वेक्षणों के जरिए भ्रम और विभाजन फैलाया, भाजपा एकता, पारदर्शिता और सभी के विकास की पक्षधर है। हमारी सरकार ने पहले ही आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को 10 प्रतिशत आरक्षण देकर सामाजिक न्याय के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखाई है, जिससे लाखों लोगों को लाभ मिला बिना किसी सामाजिक विवाद के।”
