सतना: भरपूर बारिश के बाद उमस भरा मौसम स्वास्थ्य के लिहाज से सबसे अधिक संवेदनशील माना जाता है. लिहाजा ऐसे समय में जबकि लोगों को चिकित्सा सुविधाओं की सबसे अधिक आवश्यकता होती है, जिला चिकित्सालय की आधारभूत व्यवस्थाएं लड़खड़ाती नजर आ रही हैं. सीटी स्कैन मशीन का खराब होना, टिटनेस के इंजेक्शन का स्टॉक समाप्त हो जाना, आईसीसीयू फस्र्ट का बंद हो जाना और पेयजल व्यवस्था बाधित होने जैसी अव्यवस्थाएं जिम्मेदारों की कार्यशैली को आईना दिखाने के लिए काफी मानी जा सकती हैं.
जिला अस्पताल के नैदानिक केंद्र में पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप आधार पर सीटी स्कैन मशीन स्थापित है. जिसमें हर रोज ओपीडी से लेकर आईपीडी के सैकड़ों मरीज अपनी जांच कराने के लिए पहुंचते हैं. सीटी स्कैन के लिए मरीजों से बाकायदा 1033 रुपए से लेकर 1699 रुपए की फीस भी वसूली जाती है. मरीजों की जांच से लेकर मशीन के अनुरक्षण की जिम्मेदारी जयपुर की एक निजी कंपनी संभालती है. लेकिन पिछले दो दिनों से जिला चिकित्सालय में सीटी स्कैन की जांच बंद है. जिसके पीछे का कारण सीटी स्कैन मशीन में तकनीकी गड़बड़ी आ जाना बताया जा रहा है.
स्थानीय प्रबंधन के अनुसार कंपनी द्वारा जयपुर से इंजीनियर भेजा जाएगा. इंजीनियर द्वारा सुधार कार्य किए जाने के बाद ही अस्पताल में सीटी स्कैन की जांच की सुविधा बहाल हो सकेगी. वहीं अस्पताल प्रशासन ने भी इस मामले में हाथ खड़े करते हुए जिम्मेदारी संबंधित कंपनी पर डाल दी है. लेकिन व्यवस्था की इस खामी के चलते हर रोज जिला चिकित्सालय की ओपीडी और आईपीडी में पहुंचने वाले मरीजों को भुगतना पड़ रहा है.
आपात स्थिति वाले मरीजों को खासे खर्चीले निजी जांच केंद्रों का रुख करना पड़ रहा है. जिन मरीज के परिजनों की इतनी आर्थिक क्षमता नहीं है वे बेचारे मजबूर होकर सीटी स्कैन मशीन के ठीक होने का इंतजार कर रहे हैं. इसी कड़ी में जिला चिकित्सालय का आईसीसीयू फस्र्ट वार्ड भी अचानक बंद कर दिया गया. बताया गया कि इस वार्ड में अधिकांशत: हृदय रोग के मरीज भर्ती होते थे. जिसके प्रभारी हृदय रोग विशेषज्ञ हैं. गौरतलब है कि आईसीयू में बिस्तरों की सीमित संख्या के चलते यहां पर भर्तीं होने के लिए मरीज के परिजनों को काफी पापड़ बेलने पड़ते हैं. वहीं अब इस वार्ड के बंद हो जाने से मरीजों के लिए समस्या खासी बढ़ गई है.
टिटनेस इंजेक्शन 3 दिन से नहीं
जिला चिकित्सालय में उपलब्ध चिकित्सा सुविधाओं की अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है टिटनेस का इंजेक्शन जैसी आधारभूत दवा का स्टॉक पिछले 3 दिन से समाप्त है. इस संबंध में अस्पताल के स्टोर प्रभारी राघवेंद्र मिश्रा को लिखित जानकारी भी उपलब्ध कराई जा चुकी है. लेकिन इसके बावजूद भी कोई सुनवाई नहीं हुई. नतीजतन मरीजों को निजी दुकानों से इंजेक्शन खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है.
पेयजल व्यवस्था बाधित
जिला चिकित्सालय परिसर में पहले जहां आधा दर्जन स्थानों को पेयजल की व्यवस्था उपलब्ध हुआ करती थी. वहीं अब यह घटकर केवल स्थान स्थान तक सीमित हो गई है. इतना ही नहीं बल्कि पुलिस चौकी के बगल में स्थापित पेयजल व्यवस्था पिछले दो दिनों से बाधित बनी हुई है. जिसके पीछे की वजह जिम्मेदार कर्मचारी की लापरवाही और अस्पताल प्रशासन की अनदेखी बताई जा रही है. नतीजतन मरीज और उनके परिजनों को बाहर सडक़ पर जाकर सेवा संकल्प हनुमान मंदिर में लगे नल का सहारा लेना पड़ रहा है
