नयी दिल्ली (वार्ता) उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को तमिलनाडु के कुख्यात ‘कन्नगी-मुरुगेसन’ ऑनर किलिंग मामले में ‘दोषियों’ को ‘दोषी’ ठहराया और मद्रास उच्च न्यायालय के 2022 के फैसले को चुनौती देने वाले नौ दोषियों और दो पुलिसकर्मियों की अपील को खारिज कर दिया।
न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया और न्यायमूर्ति पी.के. मिश्रा की पीठ ने कन्नगी के पिता और भाई सहित दोषियों को दी गई आजीवन कारावास की सजा की पुष्टि की और जांच के दौरान सबूत गढ़ने के लिए ‘दोषी’ ठहराए गए दो पुलिस अधिकारियों की अपील को खारिज कर दिया।
यह मामला अंतरजातीय जोड़े एस. मुरुगेसन और डी. कन्नगी की नृशंस हत्या से जुड़ा था। दलित और केमिकल इंजीनियरिंग स्नातक मुरुगेसन और वन्नियार समुदाय से वाणिज्य स्नातक कन्नगी ने पांच मई, 2003 को गुप्त रूप से विवाह किया था। विवाह का पता चलने पर, कन्नगी के परिवार ने सात जुलाई, 2003 को जोड़े को पकड़ लिया, उन्हें ज़हर पीने के लिए मजबूर किया और बाद में उनके शवों को जला दिया।
तमिलनाडु में पहले ऑनर किलिंग मामलों में से एक के रूप में पहचाने जाने वाले इस मामले को स्थानीय पुलिस की ओर से दोषपूर्ण जांच के बाद केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को इसकी जांच सौंप दी गयी।
वर्ष 2021 में, ट्रायल कोर्ट ने कन्नगी के भाई मरुदुपांडियन को मौत की सजा सुनाई और उसके पिता सहित 12 अन्य को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। वर्ष 2022 में, मद्रास उच्च न्यायालय ने मरुदुपांडियन की मौत की सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया और नौ अन्य की आजीवन कारावास की सजा की पुष्टि की, जबकि दो लोगों को बरी कर दिया।
शीर्ष न्यायालय ने आज न केवल उच्च न्यायालय के निष्कर्षों को बरकरार रखा, बल्कि राज्य को मुरुगेसन के पिता और सौतेली माँ को संयुक्त रूप से पांच लाख रुपये का मुआवजा देने का निर्देश भी दिया।
जाति आधारित हिंसा के खिलाफ एक कड़ा संदेश देते हुए न्यायालय ने कहा,“इस अपराध की जड़ में भारत में गहराई से जड़ जमाए हुए पदानुक्रमित जाति व्यवस्था है, और विडंबना यह है कि इस सबसे अपमानजनक कृत्य को ऑनर किलिंग के नाम से जाना जाता है।” न्यायालय ने यह भी कहा,“अपराध राज्य के खिलाफ एक कृत्य है। लेकिन एक दुष्ट और घिनौना अपराध, जैसा कि हमने अभी निपटाया है, हमारी गहराई से जड़ जमाए हुए जाति संरचना की बदसूरत वास्तविकता है। ऑनर किलिंग, जैसा कि इसे कहा जाता है, को कड़ी सजा मिलनी चाहिए।”
वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ अग्रवाल और गोपाल शंकरनारायणन अपीलकर्ताओं की ओर से पेश हुए, जबकि अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल विक्रमजीत बनर्जी ने सीबीआई का प्रतिनिधित्व किया। अधिवक्ता राहुल श्याम भंडारी मुरुगेसन के माता-पिता की ओर से पेश हुए।
