कोटि तीर्थ के जल से होता है प्रतिमाओं का जलाभिषेक
कुंड को स्वच्छ करने की फिर प्रारंभ हुई कवायद
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर लगाया आरो सिस्टम, कुंड में जम रही गाद
उज्जैन: सुप्रीम कोर्ट ने विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर में प्रतिमाओं के क्षरण पर संज्ञान लिया उसके पश्चात तमाम तरह के दिशा निर्देश देते हुए बिंदु तय किए गए थे. उसमें प्रमुख बिंदु कोटि तीर्थ के जल को लेकर भी उल्लेखित है, जिसमें कुंड के जल से ही बाबा का जलाभिषेक होता है, हाल फिलहाल कोटि तीर्थ में गाद जम गई है, प्रतिमा क्षरण के साथ- ही मछलियों का भी मरण हो रहा है.
भीषण गर्मी प्रारंभ होते ही विश्व प्रसिद्ध बाबा महाकालेश्वर के मंदिर में शीतलता प्रदान करने की चहूं और कवायद प्रारंभ हो गई है. बाबा महाकाल को भी 11 मिट्टी के कलश बांधे गए हैं, जिनमें देश की 11 पवित्र नदियों का जल समाहित करके भगवान को शीतलता प्रदान की जा रही है. वहीं श्रद्धालुओं को भी ठंडक पहुंचाने के प्रयास किया जा रहे हैं.
कोटि तीर्थ में जमी गाद
नवभारत ने महाकाल मंदिर के कोटि तीर्थ के संबंध में जानकारी ली तो सामने आया कि कुंड को मजदूरों के माध्यम से स्वच्छ किए जाने की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी है. कुंड के पानी को मोटर से खाली करके नीचे तक गाद निकाली जा रही है. यही कारण है कि सुप्रीम कोर्ट ने दिशा निर्देश दिए थे कि कोटि तीर्थ को स्वच्छ रखा जाए उसमें गंदगी ना हो, इसी जल से महाकाल का जलाभिषेक होता है.
मछलियों को शिप्रा नदी में छोड़ा
भीषण गर्मी के दौरान कोटि तीर्थ ही नहीं बल्कि शिप्रा नदी में भी मछलियां मर रही है, इधर कोटि तीर्थ को साफ करने के दौरान एक बर्तन में सभी मछलियों को एकत्रित किया गया और शिप्रा नदी में छोड़ दिया गया है. हालांकि कुछ मछलियों को कोटि तीर्थ में पुनः छोड़ने के लिए संग्रहित कर लिया है. कुल मिलाकर मंदिर के देवालय शिवालयों की प्रतिमाओं के क्षरण के साथ-साथ मछलियों का भी मरण हो रहा है.
सुप्रीम कोर्ट ने बनाई कमेटी, आरओ प्लांट लगाया
ज्योतिर्लिंग के क्षरण को रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित एक्सपर्ट कमेटी ने भगवान महाकाल का अभिषेक आरओ जल से करने का सुझाव दिया है. इसके परिपालन में मंदिर समिति ने ग्वालियर के अंतरराष्ट्रीय जलविद् डॉ. दुष्यंत दुबे की मदद ली है. कोटितीर्थ के जल को शुद्ध करने के लिए ओजोनेशन प्लांट लगाया है. जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा यह नहीं बताया जाता है कि कोटितीर्थ जल का पहले कितना टीडीएस था ,प्लांट लगाने के बाद कितना टीडीएस है, गाद क्यों जम रही है, मछलियां क्यों मर रही है.
15 लाख का प्लांट
कोटितीर्थ कुंड में 15 लाख रुपये की लागत से ओजोनेशन प्लांट स्थापित किया था. इस प्लांट में 64 डिफ्यूजर तथा दो ब्लोअर लगे हैं. कोटितीर्थ कुंड के जल को शुद्ध रखने के लिए प्रति घंटे जल में 81.3 क्यूबिक मीटर आक्सीजन तथा 20 मिली ग्राम ओजोन का डोज दिया जा रहा है. दावा किया गया था कि इस मिश्रण से जल पूर्णतः शुद्ध रहता है। इससे कोटितीर्थ कुंड की मछलियों को किसी प्रकार का कोई खतरा नहीं रहता है। बावजूद कोटि तीर्थ को साल में दो-तीन बार साफ करना पड़ रहा है, मछलीयां भी मरती है, ऐसे में एक बार फिर कोटि तीर्थ के जल की जांच आवश्यक प्रतीत हो रही है.
कोटि तीर्थ की रूटीन सफाई हो रही
विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर में प्राचीन कोटि तीर्थ है, इसी के जल से बाबा महाकाल का जलाभिषेक होता है, सुप्रीम कोर्ट के दिशा निर्देश का पालन किया जा रहा है, ओजोनेशन प्लांट भी लगा है. रूटीन में कोटि तीर्थ की जो साफ सफाई होती है, उसी के अंतर्गत एक बार फिर इसे स्वच्छ किया जा रहा है. मछलियों को शिप्रा नदी में छोड़ दिया गया है, कुछ मछलियां वापस कोटितीर्थ में छोड़ने के लिए बचाई है.
– मूलचंद जूनवाल, सहायक प्रशासक महाकाल मंदिर
