
विदिशा, सिरोंज विधायक उमाकांत शर्मा बयानों को लेकर हमेशा ही चर्चाओं में रहते हैं.विधानसभा बजट सत्र के आखिरी दिन विधायक ने वेतन और भत्ता न लेने का निर्णय लिया. शर्मा ने कहा कि राजनीति सेवा के लिए है.हम पंडित दीनदयाल उपाध्याय को अपना आदर्श मानते हैं.
इसके पहले भी उमाकांत शर्मा ने अपने विधानसभा क्षेत्र में पार्टी कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों सहित के साथ ही आम जनता से उन्हें किसी भी व्यक्तिगत कार्यक्रम में आमंत्रित नहीं किये जाने का आग्रह किया था. श्री शर्मा का कहना था कि जनप्रतिनिधि विकास के लिये चुने जाते हैं.लेकिन व्यक्तिगत कार्यक्रमों में ही उलझकर रह जाते हैं.कार्यक्रम इतने अधिक होते हैं कि सभी के यहां पहुंचना संभव नहीं हो पाता.इस बात को लेकर भी विधायक उमाकांत शर्मा काफी चर्चाओं में रहे थे.
और अब विधानसभा सत्र के अंतिम दिन वेतन, भत्ते एवं पेंशन नहीं लिये जाने की घोषणा करने के बाद उन्होंने सदन में बैठे अन्य सभी विधायकों और मंत्रियों को भी सलाह देते हुए कहा-राजनीति सेवा के लिए करें. उमाकांत ने कहा कि जनसेवा के लिए विधायक बने हैं ऐसे में जब जनसेवा ही हमारा उद्देश्य है तो शासकीय लाभ लेने का कोई मतलब नहीं.
क्या बोले भाजपा विधायक ?
शर्मा ने कहा कि राजनीति सेवा के लिये की जा रही है और इसका आदर्श जिनके पास स्वयं का घर नहीं, हमारे प्रधानमंत्री हैं.विधायक , सांसद अपने क्षेत्र में ईमानदारी से विकास कार्य कर रहे हैं तथा तनख्वाह लेना भी छोड़ रहे हैं.इस पर एक सदस्य ने कहा कि आप भी पंडित जी तनख्वाह लेना छोड़ दो.इसके जवाब में उमाकांत शर्मा ने कहा कि आज मैं भी तनख्वाह लेना छोड़ रहा हूं.
विधायक शर्मा ने कहा कि मैं प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री के राहत कोष में अपना वेतन दूंगा. यही नहीं उमाकांत ने दूसरे विधायकों-मंत्रियों को भी सलाह दी कि वो भी अपना वेतन, भत्ता और पेंशन छोड़ें. इसके अलावा गाय की सार में सोने पर भाजपा विधायक ने कहा कि गाय हमारी माता है और उसकी सेवा करना हमारा परम धर्म है.
बातोंं में नहीं कर्म में भी होना चाहिये सच्चाई-उमाकांत
इस संबंध में सिरोंज विधायक उमाकांत शर्मा ने चर्चा में बताया कि मेरा यह निर्णय किसी पर कोई एहसान नहीं है.स्वयं का स्वविवेक से लिया हुआ निर्णय है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से प्रेरणा लेकर पंडित दीनदयाल उपाध्याय के पद चरणों पर चलने का प्रयास है.हमारी बातों में नहीं कर्म में भी सच्चाई , ईमानदारी और धर्म होना चाहिए. राजनीति को कुछ लोगों ने धंधा बना लिया है.मुझे जनता ने विकास के लिए चुना है .जनप्रतिनिधि एक सेवक है और मैं जनता का सेवक हूं. मैं अपने कर्म से धन अर्जित कर अपना तथा अपने परिवार का पालन करूंगा.
