बॉयलर विधेयक पर चर्चा के दौरान भोपाल गैस कांड की याद आयी

नयी दिल्ली 25 मार्च (वार्ता) लोकसभा में बॉयलर विधेयक में चर्चा के दौरान भोपाल गैस कांड की यादें उभर आयीं और विपक्ष के कई सदस्यों ने देश के औद्योगिक इकाइयों में बॉयलरों के डिजायन के ऑडिट करने एवं बॉयलरों के संचालन, देखरेख में कुशल एवं प्रशिक्षित इंजीनियरों एवं कामगारों की नियुक्ति पर बल दिया।

समाजवादी पार्टी के आनंद भदौरिया ने चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि सरकार की मंशा है कि विदेशी एवं बड़े उद्योगपतियों को सुविधा दे कर छोटे एवं मझाेले उद्योगपतियों को नुकसान पहुंचाने की है। बॉयलर पर पुराने ढांचे को थोपना चाहती है। जापान ने इसे रद्द करके कार्यक्षेत्र सुरक्षा कानून के दायरे में लाया है। यदि अंधाधुंध लाइसेंस बांटे गये तो फिर दुर्घटनाएं होंगी।

तृणमूल कांग्रेस के प्रो. सौगत राय ने विधेयक का समर्थन करते हुए कहा कि दो प्रकार के बॉयलर हैं एक विनिर्माण के लिए और दूसरा बॉयलर को खड़ा करने के लिए। बिना पर्याप्त निरीक्षण के बने बॉयलर दुर्घटना का कारण बन सकता है। इसके लिए शिकायत निस्तारण की प्रणाली भी है। उन्होंने कहा कि उनके निर्वाचन क्षेत्र में कई कारखानों में बॉयलर बुरी दशा में हैं। इनकी मरम्मत करने की जरूरत है।

द्रमुक की ओर से डी एम कथीर आनंद ने कहा कि इस विधेयक में नियमित जांच करने एवं लाइसेंस के नवीकरण के बारे में कई कमियां हैं। उन्होंने भोपाल गैस कांड की याद दिलायी और चेताया कि इस दुर्घटना का कारण बॉयलर ही था। इस दुर्घटना में हजारों लोगों की जानें गयीं थीं। नियमावली के उल्लंघन पर कड़े प्रावधान होने चाहिए। विश्व में स्मार्ट बॉयलर की ओर बढ़ गया है और इस विधेयक में 1923 के बॉयलर के आधार पर प्रावधान किये गये हैं।

जनता दल यूनाइटेड के कौशलेंद्र कुमार ने कहा कि यह विधेयक बॉयलर की डिजायन को प्रमाणित करने का प्रावधान करता है। सारी दुर्घटनाएं बॉयलर की डिजायन की कमी के कारण होतीं हैं। इसमें राज्यों के अधिकार सुरक्षित रखे गये हैं। देश में करीब 40 लाख बॉयलर हैं। इसमें बॉयलर के निर्माण, देखरेख, मरम्मत आदि के लिए स्पष्ट प्रावधान हैं। हाल ही में बॉयलर के फटने की कई घटनाओं में अनेक श्रमिकाें की जानें गयीं हैं।

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार) के बजरंग सोनवणे ने कहा कि इस विधेयक के कारण कई गंभीर चिंताएं पैदा हुईं हैं। इसमें निरीक्षक, मुख्य निरीक्षक के निर्णय को किसी भी अदालत में चुनौती नहीं दी सकती है। यह न्यायिक अधिकारों का हनन है। केन्द्रीय बॉयलर बोर्ड की स्थापना राज्यों के अधिकारों को नियंत्रित कर सकती है। बॉयलर स्टाफ का कुशल एवं प्रशिक्षित होना जरूरी है। इसके प्रावधान भी करने चाहिए। विधेयक में इन बातों को लेकर कोई स्पष्टता नहीं है।

शिवसेना के रवीन्द्र वायकर ने कहा कि इस विधेयक के माध्यम से बॉयलर के तीसरे पक्ष से निरीक्षण की व्यवस्था की गयी है। पुराने प्रावधान हटा कर नये प्रावधान लाये गये हैं। सात में से चार में भी आपराधिक दंडात्मक कार्रवाई की जा सकेगी। राज्यों एवं केन्द्र के अधिकार स्पष्ट रूप से परिभाषित किये गये हैं। राज्यों को प्रावधानों से छूट देने का अधिकार रहेगा जिसकी जरूरत नहीं है। यह विधेयक औद्योगिक सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।

कांग्रेस के शेर सिंह घुबाया ने कहा कि जिन उद्योगों में बॉयलर होते हैं वे अकुशल श्रमिकों को इसके संचालन का जिम्मा दे देते हैं। कुशल एवं प्रशिक्षित स्टाफ एवं इंजीनियरों की नियुक्ति की आवश्यकता है। इसके अलावा उससे निकलने वाले पानी का शोधन करने की बहुत जरूरत है। बॉयलर के अशाेधित पानी के कारण कैंसर जैसी बीमारियां फैल रहीं हैं। पर्यावरण का नुकसान पहुंच रहा है।

भाजपा के हसमुख भाई पटेल ने कहा कि यह विधेयक गुलामी काल की औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्त होने की दिशा में बड़ा कदम है। यह विधेयक गरीब कल्याण को समर्पित है क्योंकि बॉयलर दुर्घटना का शिकार गरीब मजदूर होता है। इससे कारोबारी सुगमता भी आएगी।

राष्ट्रीय जनता दल के अभय कुमार सिन्हा और तेलुगु देशम पार्टी के बस्तीपति नागराजू ने भी चर्चा में भाग लिया। श्री सिन्हा ने भोपाल गैस त्रासदी को याद किया और उससे हासिल सबक को संज्ञान में लेने की मांग की।

कांग्रेस के एडवोकेट के फ्रांसिस जार्ज ने कहा कि इस विधेयक में मामूली परिवर्तन किया गया है। सरकार अगर इसे आधुनिक बनाना चाहती थी तो इसके लिए अलग से सुरक्षा संहिता लाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस विधेयक प्राकृतिक नियम के विपरीत है। इसे नौकरशाही के मकड़जाल में फंसाया जा रहा है। इसके तहत छोटे-छोटे उद्योग इस मनमानी कानून को नहीं मान पायेगा। उन्होंने कहा कि क्या यह बायलर की सुरक्षा के बारे में है या नियंत्रण के बारे में है। उन्होंने विधेयक को वापस लेकर राज्यों के साथ विचार विमर्श करके विधेयक लाना चाहिए।

रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी के एन के प्रेमचंद्रन ने कहा कि वह विधेयक का समर्र्थन करते हैं लेकिन इसमें उनकी कई आपत्तियां है। उन्होंने कहा कि क्या सुरक्षा की पहलू को नजरअंदाज किया गया है इस पर सदन को विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि इसमें ऐसे प्रावधान किया गया है जो विवाद पैदा कर सकता है। पिछले कुछ साल में जितने भी विधेयक लाये गये हैं उनमें सुगमता लाने की बात की जाती है लेकिन जीडीपी के विकास के नाम पर सुरक्षा पर समझौता किया जाता है। उन्होंने कहा कि इस विधेयक में सुरक्षा के साथ समझौता किया गया है। भोपाल गैस के पीडितों को आज भी मुआवजा नहीं प्राप्त हुआ है और उनके मामले आज भी लंबित है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण और जैविक सुरक्षा के साथ समझौता किया जा रहा है।

शिवसेना के अरविंद सावंत (उद्धव गुट) ने कहा कि इस विधेयक में सुरक्षा मानकों की अनदेखी की गई है। उन्होंने कहा कि इस विधेयक को श्रमिकों सुरक्षा देने के लिए ला रहे है लेकिन जो बायलर के आसपास तापमान बढ जाता है इस बारे में कोई विचार किया गया है कि नहीं यह पता नहीं चलता है। उन्होंने कहा कि एक विशेषज्ञ बायलर इंजीनियर की भी आवश्यकता है जो जांच करेगा। विधेयक का समर्थन करता हूं लेकिन सावधानियों को ध्यान रखा जाना चाहिए।

आईयूएमएल के ईटी मोहम्मद बशीर ने कहा,“ हमें एक व्यापक विधेयक लेकर आना चाहिए था जिसमें पर्यावरण के लिए भी प्रावधान होना चाहिए था। उन्होंने कहा कि विभिन्न समितियों में कामगारों की भूमिका सुनिश्चित की जानी चाहिए। जोखिमों को कम करने के लिए सुरक्षा उपायों को बढाने के लिए कदम उठाने की आवश्यकता है। दुर्घटनाओं को रोकने के लिए एआई का भी इस्तेमाल किया जाना चाहिए है।”

भाजपा की लता वानखेडे ने कहा,“ हमारी सरकार श्रमिकों को प्राथमिकता देकर वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार कर रही है। श्रमिकों की दशा को सुधारने के लिए लिए मोदी सरकार ने संकल्प लिया है।” उन्होंने कहा कि इस विधेयक से औद्योगिक इकाइयों में परिवर्तन लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायेगा। यह विधेयक औद्योगकि क्षमता को बढावा देता है। यह उद्योगों नई उर्जा देगा।

भाजपा की भारती पारधी ने कहा कि इसके पहले की सरकारों ने बायलर विधेयक की चिंता नहीं की है। यह विधेयक बायलरों के डिजाइन और सुरक्षा को आधुनिक मानकों के अनुरुप बनाता है। बायलर के सुरक्षा मानकों का उल्लंघन करने पर दंड का प्रावधान भी किया गया है।

Next Post

पचौर में ड्रोन सर्वे शुरु

Tue Mar 25 , 2025
  सिंगरौली। जिले में नए कोल ब्लॉक बंधा नार्थ जेपी अमिलिया पचौर से आगामी दिनों में होने वाले ड्रोन सर्वे का विरोध हो रहा है। इसके बावजूद भारी पुलिस बल की मौजूदगी में आज कलेक्टर के निर्देश पर प्रभावित गांव का ड्रोन सर्वे किया गया। बंधा नार्थ कोल ब्लॉक में […]

You May Like