रीवा में खनन से होने से वाले प्रदूषण पर जवाब तलब

वन विभाग के पीएस सहित अन्य को नोटिस

जबलपुर: रीवा में खनन गतिविधि के कारण होने वाले प्रदूषण और पर्यावरणीय नुकसान को लेकर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) में जनहित याचिका दायर की गई है। मामले पर प्रारंभिक सुनवाई के बाद जस्टिस शिव कुमार सिंह व एक्सपर्ट मेम्बर डॉ. अफरोज अहमद की युगलपीठ ने मुख्य सचिव, पर्यावरण एवं वन विभाग के प्रमुख सचिव, केन्द्रीय एवं राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल, कलेक्टर व अन्य को नोटिस जारी कर जवाब पेश करने के निर्देश दिये है।

रीवा निवासी अनुप सिंह की ओर से अधिवक्ता अमित सिंह सेंगर ने पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि उल्ट्राटेक कंपनी के प्रोजेक्ट संचालन के लिए करीब 6 सौ एकड़ क्षेत्र में खनन का काम होता है। नियमानुसार 33 फीसदी क्षेत्र ग्रीन बेल्ट एरिया के रूप में विकसित करना होता है, जोकि नहीं किया गया। स्प्रिंकल से छिडक़ाव नहीं होता है। आसपास के निवासियों के मकान, स्कूल, कृषि क्षेत्र के साथ जलस्रोत के साथ भूजल भी प्रदूषित हो गया है।

याचिका में बताया गया कि नियमानुसार कुल लाभ का कुछ प्रतिशत पैसा एन्वायरन्मेंटल रिस्टोरेशन के लिए खर्च करना होता है। इसमें स्कूल, स्वास्थ्य, मेडिकल, जल शोधन, डस्ट कंट्रोल आदि में ये पैसा खर्च किया जाता है। ऐसा नहीं होने पर याचिका दायर की गई है। इतना ही नहीं कंपनी द्वारा नया प्रोजेक्ट भी ला रही है। याचिका में मांग की गई कि पर्यावरणीय नुकसान का आंकलन करने के लिए एक्सपर्ट कमेटी का गठन किया जाये। सुनवाई पश्चात् न्यायालय ने उक्त निर्देश दिये।

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