
सतना/चित्रकूट।विश्व जल दिवस के अवसर पर आज ग्रामोदय विश्वविद्यालय के ऊर्जा एवं पर्यावरण विभाग के प्राध्यापकों एवं विद्यार्थियों ने संयुक्त रूप से नदी सफाई और विमर्श कार्यक्रम का आयोजन किया। कुलगुरु प्रो भरत मिश्र के नेतृत्व में चित्रकूट की जीवन रेखा पवित्र सलिला मां मंदाकिनी के स्फटिक शिला घाट पर सफाई का कार्यक्रम किया गया । प्रभु श्री राम के वनवास काल के दौरान इन्द्र पुत्र जयंत द्वारा भगवती सीता के पैरों में चोंच मारा जाना एवं भगवान राम द्वारा उसे दंडित किया जाने का संदर्भ इस घाट की पौराणिकता को बताता है।
सफाई के दौरान इस घाट पर बड़ी मात्रा में नदी में प्लास्टिक की बोतलें, जूते,चप्पल, कपड़े, खाद्य अपशिष्ट इत्यादि पड़े हुए मिले। पुनश्च में नदी में लगातार खाद्य गंदगी एवं गंदा पानी जाने के कारण उसके कारण वहां पर यूट्रॉफिकेशन की समस्या के कारण शैवाल भी बहुत उगे हुए थे। उक्त शैवालों को पानी के अंदर जाकर जड़ से उखाड़ करके साफ किया गया ,साथ ही और बहुत सी गंदगी जो नदी में उपस्थित थी उसको बाहर निकाला गया। ग्रामोदय विश्वविद्यालय के कुलगुरु, प्राध्यापक एवं छात्रों की नदी के प्रति संवेदनशीलता को देखते हुए इस कार्य में स्थानीय लोगों द्वारा नदी सफाई कार्यक्रम में सहभागिता और सहयोग किया गया। इस मौके पर ऊर्जा और पर्यावरण विभाग के अध्यक्ष प्रो घनश्याम गुप्ता ने बताया कि ऐसे कार्यक्रम करने का प्रमुख उद्देश्य जन जागरूकता फैलाना ही है।नदी की सफाई होना एक छोटा पहलू है। मुख्य पहलू यह है कि समाज में यह संदेश जाए की नदियां जिनको हमारे सनातन में मां का दर्जा दिया गया है उनको हम कैसे संरक्षित व संवर्धित करें।मंदाकिनी तो चित्रकूट की जीवन रेखा एवं अमूल्य धरोहर है। यदि मंदाकिनी नहीं होगी तो निश्चय ही चित्रकूट का अस्तित्व नहीं रह जाएगा।
