
नव भारत न्यूज
इंदौर। लोकतंत्र में निवेश जरूरी है , लोकतंत्र तभी सशक्त होगा जब नागरिक उसमें सक्रियता से भाग लेंगे। पूर्व केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने विभिन्न उदाहरणों के माध्यम से बताया कि जब देश प्रगति कर रहा है, तो चुनाव प्रणाली में भी बदलाव की आवश्यकता है। भारत का लोकतंत्र दुनिया में सबसे मजबूत है और इसे और प्रभावी बनाने के लिए “एक देश, एक चुनाव” को लागू करना एक महत्वपूर्ण कदम होगा।
आज आईसीएआई भवन में सीए एसोसिएशन और अधिवक्ताओं के साथ विशेष चर्चा का आयोजन किया था। उक्त कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के तौर पर प्रसाद ने उक्त बात कही।
कार्यक्रम में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने संबोधित करते हुए कहा कि अगर लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ होते हैं, तो इससे सरकार के साथ-साथ प्रतिनिधियों का भी खर्च कम होगा। उन्होंने कहा कि बार-बार चुनाव होने से धन और संसाधनों की बड़ी मात्रा में बर्बादी होती है, जिसे रोका जा सकता है। साथ ही, इससे प्रशासनिक प्रक्रिया को अधिक सुचारू और पारदर्शी बनाया जा सकता है।
महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने कहा कि अलग-अलग चुनाव कराने पर देश का खर्च 5 से 6 लाख करोड़ रुपए आता है, जबकि एक साथ चुनाव होने पर यह खर्च घटकर 1 से 1.5 लाख करोड़ रुपए रह जाएगा। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2019 और 2024 के चुनावी घोषणा पत्र का जिक्र करते हुए कहा कि “एक देश, एक चुनाव” की दिशा में देश में जनमत तैयार करना आवश्यक है। उन्होंने युवा प्रोफेशनल्स से इस मुहिम को समर्थन देने की अपील की ।
कार्यक्रम में भाजपा संभाग प्रभारी राघवेंद्र गौतम, नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा, विधायक उषा ठाकुर सहित बड़ी संख्या में सीए प्रैक्टिशनर्स, अधिवक्ता और छात्र मौजूद थे।
