अपनी ही सरकार को क्यों घेर रहे भाजपा विधायक…?

महाकौशल की डायरी

अविनाश दीक्षित

ये पहला मौका नहीं है जब किसी नेता ने अपनी ही सरकार को कटघरे खड़ा किया। इसके पहले भी प्रदेश में कई भाजपा विधायकों ने अपनी ही पार्टी के विरोध में आवाज बुलंद की है। चुनावी मैदान में प्रतिद्वंदी कांग्रेस पार्टी तो वैसे ही हर विशेष मुद्दे को उठाकर भाजपा सरकार को घेरने का काम करती आई है। लेकिन इस बार जबलपुर की पाटन विधानसभा सीट से विधायक अजय विश्नोई ने कांग्रेस के सुर से सुर मिलाकर अपनी सरकार को घेरा है।

दरअसल इसकी वजह महाकोशल के सबसे बड़े जिले जबलपुर में करीब 5 करोड़ रुपए की धान उपार्जन घोटाला मामला है जो कि इन दिनों एक बड़ा मुद्दा बनकर रह गया है। हालात ऐसे बने कि विधायक अजय विश्नोई ने विधानसभा के बजट सत्र के दौरान सवाल उठाते हुए कहा कि एक महीने बाद भी धान उपार्जन घोटाले की जांच पूरी क्यों नहीं हुई? इस मुद्दे पर भाजपा विधायक गोपाल भार्गव ने भी उनका समर्थन किया। इस मौके पर भाजपा विधायक गोपाल भार्गव ने कहा कि किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाना चाहिए।

कांग्रेस क्या कम पड़ गई थी?

महाकौशल , विंध्य के साथ जबलपुर की राजनीति में भाजपा के दिग्गज नेताओं के बीच दबे मुंह से ये भी चर्चा है कि आखिर विधायक अजय विश्नोई को क्या जरूरत पड़ गई अपनी ही पार्टी की ही पोल खोलने में… कई नेताओं का तो ये दबी जुबान से ये भी कहना रहा कि कांग्रेस क्या कम पड़ गई थी भाजपा सरकार को घेरने के लिए जो भाजपा के ही विधायक उनके साथ मिल गए।

विधायक विश्नोई ने जताई नाराजगी

विधायक अजय विश्नोई ने कहा कि फर्जी आरओ और ट्रांसपोर्टेशन गड़बड़ियों की जांच करना मुश्किल नहीं है, क्योंकि ट्रक नंबर से टोल नाकों पर उनके मूवमेंट को ट्रैक किया जा सकता है। उन्होंने सवाल उठाया कि एक महीने से ज्यादा समय बीत जाने के बाद भी जांच पूरी क्यों नहीं हुई? इस घोटाले को लेकर विपक्ष ही नहीं, बल्कि खुद बीजेपी के विधायक सरकार पर सवाल उठा रहे हैं। विश्नोई और भार्गव ने साफ कर दिया है कि जब तक जांच पूरी नहीं होती और किसानों को भुगतान नहीं किया जाता, तब तक वे इस मुद्दे को उठाते रहेंगे।

कलेक्टर की कार्यशैली फिर से प्रदेश में छाएगी?

इधर जबलपुर कलेक्टर दीपक सक्सेना के जारी निर्देश के बाद जिला प्रशासन की टीम 5 करोड़ की धान गायब होने के मामले में कुर्की की तैयारी कर रही है। गबन में शामिल आरोपियों की संपत्ति का मूल्याकंन किया जा रहा है और फिर उक्त आरोपियों की संपत्ति को बेचकर किसानों का भुगतान किया जाएगा। विदित हो कि किसानों की करीब 5 करोड़ 21 लाख रुपए की भुगतान राशि अटकी हुई है।

अनेक नपेंगे, लेकिन...

धान उपार्जन घोटाले में धान खरीदी सहकारी समितियां, कंप्यूटर ऑपरेटर, फर्जी बिलिंग और ट्रांसपोर्टेशन घोटाला करने वाले जालसाजों पर आने वाले दिनों में किस तरह से गाज गिरेगी ये तो समय ही बताएगा। क्योंकि जो किसान लोगों के घरों में अनाज पहुंचाते हैं उनका ही पेट अभी नहीं भरा गया है जिसका प्रत्यक्ष उदाहरण धान खरीदी का भुगतान न होना है।

भाजपा विधायक द्वारा अपनी पार्टी के ही जिम्मेदारों पर ऊंगली उठाकर कार्रवाई की मांग की गई है जो कि पूरे प्रदेश की राजनीति में एक बड़ा मुद्दा भी बन गया है। विधायक ने स्पष्ट कर दिया है कि जो भी 5 करोड़ की धान उपार्जन घोटाले में शामिल है उसके खिलाफ शासन, प्रशासन को सख्त से सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। फिर चाहे वो सत्ता में काबिज किसी पार्टी का ही बड़ा क्यों न हो या फिर कोई अधिकारी ही क्यों न हो।

मगर राजनीति के गालियारों में बड़ा सवाल यह भी कोंध रहा है कि जब जांच की रफ़्तार इतनी सुस्त है तो फिर कार्रवाई कब परवान चढ़ेगी..और इस गोरखधंधे के पीछे से अपनी रोटियां सेंक रहे सफ़ेदपोशों तक जांच की आंच पहुँच पायेगी..? चर्चा हो रही है कि जिलों में खाद्यान्न उपार्जन – परिवहन के खेल से दौलत के ढ़ेर तक और फिर राजनीतिक रसूख कायम करने वाले अनेक नेता हैं, जो इस घोटाले के पीछे हैं, किन्तु कार्रवाई की जद से बाहर बने हुए हैं.

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