
अशोकनगर। मां जानकी के धाम करीला में श्रद्धालु अपनी मन्नत लेकर पहुंच रहे है, तो वहीं श्रद्धालु मन्नतेें पूरी होने के बाद राई नृत्य करा रहे है। यह उत्सव का महौल जिला मुख्यालय से 30 किलोमीटर दूर स्थित माता जानकी के धाम करीला का है, जहां पर रंगपंचमी के अवसर पर तीन दिवसीय मेला लगता है। इस अवसर पर करीला पहाड़ी को आकर्षक लाईटिंग से सजाया गया है, तो वहीं सुरक्षा की दृष्टि से सैंकड़ो जवानों को तैनात किया गया है। बुंदेलखण्डी राई नृत्य है प्रसिद्ध: कानीखेड़ा ग्राम पंचायत के करीला धाम में मॉ जानकी के दरबार में श्रद्धालु अपनी मन्नत पूर्ण होने पर राई नृत्य कराते है, तो वहीं नृत्यागनाएं बधाई गीत गाती है। मान्यता है कि यह मां सीता के पुत्र लव-कुश के जन्म हुआ था और इसी का उत्सव महार्षि बाल्मीकि द्वारा बड़े उत्साह के साथ मनाया गया, जिसमें स्वर्ग की अप्सराएं धरती पर उतरी थी और बधाई गीत गाते हुए नृत्य किया था। उधर, माता जानकी के दरबार में सूबे के मुखिया मोहन यादव बुधवार सुबह आयेंगे, जहां वह माता जानकी के दर्शन करेंगे।
