श्रीनगर 15 मार्च (वार्ता) जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने शनिवार को कहा कि आरक्षण नीति पर विचार करने के लिए गठित कैबिनेट उप-समिति को अपनी रिपोर्ट पूरी करने के लिए छह महीने का समय दिया गया है।
यह पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के विधायक सज्जाद लोन के उस बयान के कुछ घंटों बाद आया है जिसमें उन्होंने कहा था कि आरक्षण नीति पर विचार करने के लिए गठित उप-समिति के पास कोई विशिष्ट समय-सीमा नहीं है।
श्री अब्दुल्ला ने कहा कि समिति निर्धारित समय-सीमा में अपना काम पूरा करने के लिए काम कर रही है। उन्होंने कहा,“भर्ती में आरक्षण के जटिल मुद्दे की जांच करने के लिए गठित कैबिनेट उप-समिति को अपनी रिपोर्ट पूरी करने के लिए 6 महीने का समय दिया गया है।”
मुख्यमंत्री अब्दुल्ला के कार्यालय ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा,“यह समयसीमा मैंने नौकरी चाहने वालों के एक चिंतित समूह से मुलाकात के बाद तय की थी। हालांकि, यह समयसीमा उप-समिति की स्थापना के शुरुआती क्रम में नहीं थी। उस चूक को ठीक कर लिया जाएगा, लेकिन आश्वस्त रहें कि समिति निर्धारित समय सीमा में अपना काम पूरा करने के लिए काम कर रही है।”
गौरतलब है कि उपराज्यपाल मनोज सिन्हा के नेतृत्व में केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन ने पहाड़ी समुदाय के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण लागू किया। इस बदलाव ने विभिन्न श्रेणियों में कुल आरक्षित सीटों को 60 फीसदी तक बढ़ा दिया, जिससे सामान्य श्रेणी के उम्मीदवारों के लिए केवल 40 प्रतिशत सीटें ही उपलब्ध रहीं। इसने ओपन मेरिट के उम्मीदवारों के बीच अशांति पैदा कर दी, जो इस नीति की समीक्षा की मांग कर रहे हैं।
