मुंबई, 15 मार्च (वार्ता) सम्पत्ति प्रबंध कंपनियों को सिल्वर चांदी पर आधारित एक्सचेंज-ट्रेडेड कोष (ईटीएफ) निवेश योजनाएं शुरू करने की अनुमति दिए जाने के बाद से सिल्वर ईटीएफ के अंतर्गत प्रबंधित सम्पत्तियों (एयूएम) में लगातार भारी वृद्धि देखी है। यह जेरोधा फंड हाउस की शनिवार को जारी एक रिपोर्ट में सामने आयी है।
सेबी ने नवंबर 2021 में भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने चांदी पर आधारित यूनिटों में निवेश करने की सुविधा के लिए सम्पत्ति प्रबंध कंपनियों को सिल्वर-ईटीएफ योजना शुरू करने की छूट दी थी। रिपोर्ट के अनुसार जनवरी 2025 तक सिल्वर-ईटीएफ में निवेश 13,500 करोड़ का आंकड़ा पार कर गया है।
जनवरी 2025 तक 12 सिल्वर ईटीएफ काम कर रहे थे जिनमें जिनमें छह लाख से ज़्यादा निवेशक फ़ोलियो थे।
ज़ेरोधा फ़ंड हाउस के मुख्य व्यवसाय अधिकारी (सीबीओ) वैभव जालान ने कहा, “ सिल्वर-ईटीएफ की बढ़ती संख्या इसमें निवेशकों की बढ़ती दिलचस्पी का स्पष्ट संकेत हैं। सिल्वर ईटीएफ भौतिक रूप से चांदी खरीद कर रखने की जगह चांदी में निवेश का एक ऐसा विकल्प प्रदान करते हैं जिसमें भंडारण करने, उसकी सुरक्षा और बीमा के बारे में कोई चिंता नहीं रहती है तथा चांदी के भाव में होने वाले उतार-चढ़ाव का फायदा उठाना आसान बनाते हैं। ”
रिपोर्ट में ‘द सिल्वर इंस्टीट्यूट’ के अनुमानों के आधार पर कहा गया है कि वाहन , प्रौद्योगिकी, फार्मास्यूटिकल्स और सौर ऊर्जा सहित विभिन्न उद्योगों में इसके चांदी के अनुप्रयोगों के कारण चांदी की समग्र औद्योगिक मांग में पिछले 10 साल में 55 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई है। चांदी का उपयोग विनिर्माण और औद्योगिक निर्माण में भी किया जाता है क्योंकि यह जंग नहीं खाती है और इसमें अच्छे तापीय गुण होते हैं।
जीरोधा फंड हाउस के मुख्य कार्यकारी अधिकारी विशाल जैन कहते हैं, “चांदी में निवेश पोर्टफोलियो और आधुनिक उद्योगों दोनों में भूमिका निभाने की क्षमता है। सिल्वर ईटीएफ किसी के पोर्टफोलियो में विविधता लाने और धातु की अनूठी विशेषताओं का लाभ उठाने के लिए एक मूल्यवान उपकरण है। ”
जीरोधा फंड का कहना है कि चूंकि निवेशक विविधीकरण और कमोडिटीज में निवेश चाहते हैं, इसलिए सिल्वर ईटीएफ इस बहुमूल्य धातु में निवेश करने का एक सरल और परेशानी मुक्त तरीका प्रदान करता है।
