उत्साह में लांघी मर्यादा, अब हो रही तीखी निंदा

महाकौशल की डायरी

अविनाश दीक्षित

भारतीय टीम के टी 20 वर्ल्ड कप जीतने की खुशी के जश्र, उत्साह के बीच शहर के युवा मर्यादा, संस्कारों और गरिमा को तोड़ते नजर आए। हुआ यूं कि खुशी का इजहार करते करते युवा वर्ग मालवीय चौक स्थित ख्यात शिक्षाविद व स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पंडित मदन मोहन मालवीय जी की प्रतिमा पर जूते पहनकर चढ़ गए और उत्पात मचाते रहे। इसी बीच किसी प्रबुद्धजन ने युवाओं के उत्पात का वीडियो बनाया और सोशल मीडिया में अपलोड कर दिया जिसके बाद शहर के प्रबुद्धजनों ने युवाओं की इस करतूत का तीखा विरोध किया है। खबर है कि जिन युवाओं ने ये करतूत की है उनसे से कोई युवक कांग्रेस से तो कोई एबीवीपी से जुड़ा हुआ है। विदित हो कि भारत के वर्ल्ड कप जीतने के बाद मालवीय चौक पर युवाओं का बड़ा हुजूम एकत्रित हुआ था जिस दौरान सभी ने अपने-अपने अंदाज में खुशी जाहिर करते हुए जश्र मनाया लेकिन इस जश्र के बीच युवा मर्यादा करना भूल गए जिसकी अब शहर में तीखी निंदा हो रही है। लोग सवाल यह भी उठा रहे हैं कि उक्त वीडियो वायरल हुए कई दिन बीत गये हैं मगर जिला अथवा पुलिस प्रशासन के कर्ताधर्ता अधिकारियों को अब तक यह वीडियो नजर क्यों नहीं आया है ?

आदेश ने शिक्षकों के खेमे में मचाया भूचाल….

लोक शिक्षण संचालनालय के नए फरमान ने जबलपुर के ऐसे सरकारी शिक्षकों के खेमे में भूचाल ला दिया है जो कि स्कूलों में सिर्फ रस्मअदायगी के लिए बच्चों को पढ़ाने जाते थे और सरकार से मोटी रकम बतौर पगार लेते रहे हैं। प्रदेश के सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को लोक शिक्षण संचालनालय के फरमान में स्पष्ट कहा गया है कि शिक्षा का अधिकार कानून लागू होने से पहले शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) देनी होगी और इस परीक्षा में पास होना पड़ेगा, 2 साल की समय सीमा के बीच में जो शिक्षक ये परीक्षा पास नहीं कर पाएगा उसकी सेवा समाप्त कर दी जाएगी। विभाग के आदेश को जिला शिक्षा अधिकारी ने शिक्षकों को सर्कुलेट किया तो विरोध के स्वर तेज उठने लगे। खबर है कि जिन शिक्षकों की सेवानिवृत्ति में 5 साल से ज्यादा समय बचा है, उन्हें भी अनिवार्य रूप से परीक्षा देनी होगी। विभाग जुलाई-अगस्त 2026 में विशेष टीईटी कराने की तैयारी कर रहा हैऔर इसके लिए ऐसे शिक्षकों का डेटा जुटाया जाने लगा है। विदित हो कि सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले के आधार पर विभाग ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए हैं। मतलब साफ है कि लापरवाह, गैर जिम्मेदार व विषय का ज्ञान नहीं होने वाले शिक्षकों की नौकरी पर अब संकट खड़ा हो गया है। संदेश स्पष्ट है कि योग्यता है तो आप प्रदर्शित करो और परीक्षा पास करो नहीं तो अपने घर पर बैठो ! उधर शिक्षकों ने प्रांतीय शिक्षक संघ के कंधों से सहारा मांगा है जिसको लेकर अब लोक शिक्षण संचालनालय का भी विरोध करने ,रणनीति बनाने मंथन होने लगा है। शैक्षणिक गलियारों में चर्चाएं तेज हैं कि प्रांतीय शिक्षक संघ अब इस आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटीशन दायर करने की तैयारी में जुट गया है। शिक्षक संगठनों ने भी स्पष्ट किया है कि 1995 से 2005 के बीच नियुक्त अध्यापक मैरिट के आधार पर भर्ती हुए थे। दशकों तक सेवा देने के बाद उनसे फिर परीक्षा दिलाना उनके अनुभव का अपमान है।

डॉक्टर के इस्तीफे की गूंज मंत्रियों तक पहुंची….

करीब 8 माह से वेतन नहीं मिलने और सीएमएचओ कार्यालय के चक्कर काट- काटकर थक चुके कटनी जिले के बड़वारा सामुदायिक केंद्र के मेडिकल ऑफिसर डॉक्टर नीरज विश्वकर्मा के इस्तीफे ने ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। डॉक्टर के इस्तीफे के बाद जहां स्थानीय चिकित्सा क्षेत्र में हड़कंप मच गया तो वहीं दूसरी तरफ शिकायत भोपाल तक मंत्रियों के खेमे में जा पहुंची। बावजूद इसके अभी तक डॉक्टर को वेतन संबंधी कोई राहत नहीं मिली है।
नियमों की बात करें तो करीब 1 लाख आबादी वाले बड़वारा सामुदायिक केंद्र में चार एमबीबीएस और तीन विशेषज्ञ डॉक्टरों के पद स्वीकृत हैं, जो पहले से ही कई वर्षों से खाली पड़े हैं। वर्तमान में यहां केवल दो बंध पत्र चिकित्सक कार्यरत थे। डॉ. नीरज विश्वकर्मा के इस्तीफे के बाद अब मात्र एक डॉक्टर के कंधों पर पूरे अस्पताल का बोझ आ गया है। जिसको लेकर स्थानीय लोग भी चिंता जाहिर कर ये कहते हुए नजर आ रहे हैं कि यदि अब बचे एक मात्र डॉक्टर भी अनुपस्थित रहे तो मरीजों को इलाज के लिए तरसना पड़ेगा। कटनी व बड़वारा के आसपास चर्चाएं जोरों पर हैं कि बड़वारा सामुदायिक केंद्र के मेडिकल ऑफिसर डॉक्टर नीरज विश्वकर्मा का 8 माह का वेतन जिला स्तर पर रोका गया है। कारण अभी सामने नहीं आ सका है कि वेतन किस वजह से रोका गया है। डॉक्टर विश्वकर्मा की मानें तो प्रतिदिन सामुदायिक केंद्र में ड्यूटी देने के बाद भी उन्हें अगर ये दिन देखना पड़ रहे हैं तो ये सिस्टम पर बहुत बड़ा सवाल है।

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