शहर के अमन को न लगे नजर… फिर गर्माया है प्रतिमा विवाद

ग्वालियर चंबल डायरी
हरीश दुबे

ग्वालियर चंबल में अंबेडकर प्रतिमा विवाद एक बार फिर से गरमा गया है। भीम आर्मी के नेता दामोदर यादव ने ग्वालियर हाईकोर्ट परिसर में डॉ. अंबेडकर की प्रतिमा स्थापित करने के संकल्प के साथ पदयात्रा का ऐलान किया तो प्रशासन अलर्ट मोड पर आ गया। पदयात्रा को आज बुधवार के रोज दतिया के गोराघाट से शुरू होकर डबरा में रैली और सभा करना थी लेकिन ग्वालियर के अफसरान ने गोराघाट पहुंचकर सिंध नदी पर बैरिकेडिंग कर पदयात्रियों को ग्वालियर सीमा में प्रवेश करने से ही रोक दिया। ग्वालियर और दतिया जिलों के बॉर्डर पर अभी भी 500 से अधिक जवान तैनात हैं। प्रशासन की मानें तो बिना पूर्व अनुमति के ग्वालियर जिले की सीमा में प्रवेश पर पूर्णतः प्रतिबंध लगाया गया है।

प्रशासन ने दतिया के गोराघाट और ग्वालियर के डबरा में सभाओं की परमिशन भी कैंसिल कर दी है। खास बात यह है कि कलेक्टर रुचिका चौहान और एसपी धर्मवीर सिंह खुद जिले की सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था को पुख्ता करने के लिए मोर्चा संभाले हुए हैं। न सिर्फ सिंध नदी पुल बल्कि सीमावर्ती दूसरे क्षेत्रों में भी पुलिस जवानों की तैनाती की गई है। सीमावर्ती क्षेत्रों में भी सघन तलाशी अभियान चल रहा है। हालांकि आजाद समाज पार्टी अभी भी पहले से तयशुदा कार्यक्रम के मुताबिक 14 मार्च को दोपहर बारह बजे ग्वालियर हाईकोर्ट परिसर पहुंचकर यहां अम्बेडकर प्रतिमा लगाने के संकल्प पर डटी हुई है, इसके उलट अंचल के सवर्ण समाज संगठन भी जवाबी मोर्चा खोले हुए हैं। पहले जो भी घटनाएं हुई हों लेकिन प्रशासन के सख्त इंतजामों के चलते फिलहाल पिछले कुछ हफ्तों में दोनों खेमों के बीच उग्र टकराव की नौबत नहीं आई है। हम भी यही चाहते हैं कि शहर में अमन चैन रहे और हर विवाद का हल सौहार्द और बातचीत से निपटे।

कोर्ट के फैसले के बाद विजयपुर में नहीं बनी उपचुनाव की नौबत

विजयपुर विधानसभा क्षेत्र के दोनों प्रतिद्वंदी राजनीतिक दलों ने कांग्रेस विधायक मुकेश मल्होत्रा के विपरीत फैसला आने की स्थिति में खुद को मुकम्मल रखने के लिए उपचुनाव की तैयारियां कर रखी थीं, स्थानीय जनता को भी उपचुनाव के आसार लग रहे थे लेकिन हाईकोर्ट के फैसले ने इन सभी अटकलों, कयासों और चर्चाओं पर विराम लगा दिया। पिछले उपचुनाव में पराजित हुए भाजपा प्रत्याशी रामनिवास रावत को विधायक घोषित कर दिया गया। यह कांग्रेस के लिए बड़ा झटका है। कुछ महीने पहले चुनाव हारने के बाद रामनिवास को कैबिनेट मंत्री के ओहदे से रुखसत होना पड़ा था लेकिन अब भाजपा खेमे में रामनिवास की फिर से प्रदेश की कैबिनेट में ताजपोशी की उम्मीद जताई जा रही है। हालांकि खुद रामनिवास जानते हैं कि यह सब इतना आसान नहीं होगा, वजह यह कि हाईकोर्ट ने निवर्तमान विधायक मुकेश मल्होत्रा को सुप्रीम कोर्ट में अपील करने के लिए पंद्रह दिन का समय दिया है। प्रदेश के इस बहुचर्चित राजनीतिक एवं न्यायिक प्रकरण में आगे क्या मोड़ आता है, यह कांग्रेस पक्ष के सुप्रीम कोर्ट में जाने और देश की इस सर्वोच्च अदालत के रूख पर निर्भर करता है। बहरहाल, विजयपुर उपचुनाव पर हाईकोर्ट के आदेश ने प्रदेश की राजनीति को गरमा दिया है। मामला विशुद्ध न्यायिक और दोनों पक्षों के गुण दोष के परीक्षण पर आधारित है लेकिन जैसी कि संभावना थी, कांग्रेस ने आदिवासी सम्मान का प्रश्न उठाते हुए इसे भाजपा की कथित सोच से जोड़ दिया है। आज जीतू पटवारी ग्वालियर आए तो वे भी न्यायालय के प्रति सम्मान भाव बरतते हुए भाजपा पर बरस पड़े। खास बात यह है कि मुकेश मल्होत्रा का चुनाव शून्य घोषित होने पर कांग्रेस के नेता तो मुखर और आक्रामक तेवर अपनाए हुए हैं लेकिन भाजपा पक्ष बेहद संयम का परिचय देते हुए नपी तुली शैली में ही प्रतिक्रिया दे रहा है। विजयपुर रामनिवास रावत का राजनीतिक गढ़ रहा है। वे यहां से छह बार विधायक का चुनाव जीत चुके हैं। पिछले लोकसभा चुनाव के समय वे कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आ गए थे, विधायकी भी छोड़ दी थी, इसी के बाद उपचुनाव कराए गए थे।

बालेन्दु के बंगले पर नेताओं का मेला, कभी था सियासत का पावर सेंटर

झांसी रोड का एक नंबर बंगला करीब दो दशक तक ग्वालियर चंबल की राजनीति का पावर सेंटर बना रहा। यह माधवराव के दौर की बात है जब उनके बालसखा बालेंदु शुक्ला महल के कोटे से अर्जुन, वोरा, श्यामा और दिग्विजय जैसे मुख्यमंत्रियों की सरकारों में ताकतवर मंत्री रहे। बड़े महाराज के न रहने के बाद नए महाराज से उनकी पटरी मेल नहीं खाई और उन्हें राजनीतिक अस्तित्व बनाए रखने के लिए कभी हाथी की सवारी करना पड़ी तो भगवा भी हो गए। महाराज के कांग्रेस छोड़ते ही बालसखा फिर से कांग्रेस में लौट आए। विपक्ष की राजनीति ही सही, उनका बंगला फिर आबाद है। आज होली मिलन समारोह एवं कवि सम्मेलन के बहाने उन्होंने अपने बंगले पर सूबे के तमाम बड़े नेताओं और आधा दर्जन से ज्यादा विधायकों की मौजूदगी में त्यौहार के बहाने सियासत की महफिल, बालेंदु के शब्दों में कहें तो मोहब्बत की दुकान सजाई। इस जलसे में अरुण यादव, जयवर्धन, अशोक सिंह, हेमंत कटारे सहित सतीश सिकरवार, सुरेश राजे, केशव देसाई और तमाम जिलों के कांग्रेस पदाधिकारी तशरीफ लाए। गाना बजाना और कविताओं के पाठ के साथ मंच से इतर चर्चाओं में ग्वालियर में पार्टी की कमजोर होती स्थिति को दुरुस्त करने पर भी मंथन हुआ। जलसे में जीतू पटवारी भी आ रहे थे लेकिन उनका दौरा प्रोग्राम ऐन मौके पर बदल गया। पहले उन्हें सुबह आना था लेकिन वे शाम को वंदे भारत से ग्वालियर पहुंचे। हालांकि बालेंदु अपनी सियासी एक्टिविटी पहले की ही तरह बनाए हुए हैं लेकिन खबर यही है कि वे अपनी पचास साल पुरानी राजनीतिक विरासत अपने नाती प्रांजल तिवारी को सौंपने जा रहे हैं, प्रांजल को बालेंदु ने हाल ही में युवा कांग्रेस के प्रदेश महासचिव का चुनाव बड़े अंतर से जितवाया है।

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