इंदौर: मालवा और निमाड़ अंचल में फागुन के महीने में लगने वाला भगोरिया हाट आदिवासी उल्लास, परंपरा और रंगीन संस्कृति का अनूठा प्रतीक हैं. इस वर्ष ये हाट 7 से 13 मार्च तक आयोजित किए जाएंगे, जिनकी धूम झाबुआ, अलीराजपुर, धार, खरगोन, सेंधवा और बड़वानी जैसे आदिवासी बहुल जिलों के 100 से अधिक स्थानों पर देखने को मिलेगी.
भगोरिया हाट केवल खरीदारी का स्थान नहीं, बल्कि यह लोक संस्कृति के उत्साह, प्रेम और सांस्कृतिक विरासत का उत्सव है. जैसे ही फागुन की मस्ती अपने चरम पर पहुंचती है, वैसे ही ये हाट भी बड़े मेलों का रूप ले लेते हैं. हजारों की भीड़ पारंपरिक गेर नृत्य, ढोल-मांदल की थाप और लोकगीतों के रंग में डूबी नजर आती है. स्त्री-पुरुष रंग-बिरंगे पारंपरिक परिधानों में सजे-धजे, हाथों में अबीर-गुलाल लिए उल्लास से झूमते दिखते हैं.
