इन्दौर: सामाजिक आवश्यकताओं को समझते हुए, पहले उद्योगपति, व्यवसायिक तथा व्यापारी धराने, अपनी आय का कुछ हिस्सा सामाजिक कार्यों में लगाकर ,अपना नैतिक कर्तव्य और दायित्व समझते हुए पूरा करते थे, जिनके कारण बड़े-बड़े अस्पताल, धर्मशालाएं ,स्कूल- कॉलेज आदि का निर्माण होता रहा है. इसी को अब सरकार द्वारा कानून बनाकर सी एस आर के माध्यम से पूरा कराया जाता है. सीएसआर, कोई दान नहीं है बल्कि सामाजिक दायित्व है.
उक्त बातें आज समाज कार्य महाविद्यालय में 75 में प्लेटिनम जुबली के उपलक्ष में आयोजित, राष्ट्रीय सेमिनार में विभिन्न वक्ताओं ने कहीं. पीथमपुर औद्योगिक संगठन के अध्यक्ष डॉ गौतम कोठारी सेमिनार के मुख्य अतिथि थे. उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा कि पहले कॉर्पोरेट का उद्देश्य केवल पैसे कमाना था, किंतु बाद में श्रम कल्याण तथा कानून, श्रमिकों के हित में होने एवं कार्य करने एवं श्रमिकों के हित में विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन से कारखाने की उन्नति, श्रम आंदोलनों में कमी, औद्योगिक शांति से उद्योगों एवं श्रमिकों को काफी लाभ हुआ.
डॉ कोठारी ने कहा कि सीएसआर का मुख्य उद्देश्य ,समाज के अंतिम पंक्ति के व्यक्ति तक लाभ पहुंचना है.उधर,सेमिनार के मुख्य वक्ता टाटा एक्सपोर्ट के एच आर हेड अनिल मलिक ने कहा कि व्यवसाय और सामाजिक दायित्व में एक रिश्ता था, बड़े व्यावसायिक एवं औद्योगिक घराने अपने सामाजिक दायित्व एवं आसपास की संवेदनाओं को समझते हुए,समाज विकास में अपना योगदान भी देते थे. सीएसआर के तहत कानून बनते रहेंगे, बदलते रहेंगे, मगर हम समाज के हित में अपना दायित्व पूरा करें।
