चौड़ीकरण के दावे अधूरे, मंदिर के सामने मुंह चिढ़ाता भवन

नहीं टूट पाई वीडी क्लॉथ मार्केट की 51 दुकानें और होटल मित्तल में भी स्टे

महाकाल मंदिर के आसपास काम हुआ आधा, केस की वजह से विकास में बाधा

उज्जैन: महाकाल पार्ट 2 से लेकर सिंहस्थ 2028 के तमाम ऐसे कार्य जो किसी न किसी बाधा में उलझे हुए हैं,जो अब तक पूरे हो जाने चाहिए थे. किसी में हाईकोर्ट का तो किसी मे सुप्रीम कोर्ट का स्टे है, कुछ मसले जिला प्रशासन तो कुछ जिला न्यायालय में उलझे हुए हैं.मध्य प्रदेश के अपर मुख्य सचिव राजेश राजौरा ने महाकाल मंदिर के आसपास निर्माण कार्यों, विकास कार्यों, चौड़ीकरण, सौंदर्य करण का जायजा जब लिया तो उन्हें रुका हुआ कार्य दिखाई दिया. कुछ खंडहर नुमा मकान भी उन्हें दिखाई दिए. साथ ही बेतरतीब निर्माण सामग्री भी इधर-उधर पड़ी हुई दिखी, जिस पर उन्होंने नाराजगी जताई। इस पर अधिकारियों ने कहा कि कुछ मकानों पर कोर्ट कचहरी के मामले लंबित है ,जिनका जल्द ही निराकरण होगा.

नहीं टूट पा रहा एक भवन परचूरे
महाकालेश्वर मंदिर के ठीक सामने परचुरे भवन खंडहर बन चुका है जो कभी भी गिर कर हादसे का कारण बन सकता है, बाबजूद जिम्मेदार अफसर उसे हटा नहीं पा रहे हैं. गणेश परचुरे का मकान चौड़ीकरण विस्तारीकरण सौंदर्यकरण में लंबे समय से बाधा बना हुआ है.

उक्त भवन पर यह बाधा
30 जुलाई 2021 को उक्त मकान का अवार्ड पारित हो चुका था, 23 नवंबर 2021 को घर तोड़ने के आदेश भी हुए हालांकि 24 नवंबर 2021 को परचुरे परिवार ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और याचिका क्रमांक 24 629 /2021 लगाई, जिसमें इन्हें अब तक स्टे प्राप्त है. महाकाल मंदिर के ठीक सामने 11 में से 10 मकान मालिकों से सभी घर प्रशासन ने खाली करवा लिए और कब्जा भी प्राप्त कर लिया है. सिर्फ मकान नंबर 168 परचुरे भवन का मुद्दा अब तक उलझा हुआ है. 1500 वर्ग फीट पर बना यह मकान विकास में रोड़ा बना हुआ है, जबकि महाकाल मंदिर के आसपास 70 मीटर तक चौड़ीकरण किया जाना है. सभी 11 मकान को हटाने के लिए 13 करोड रुपए की मुआवजा राशि स्वीकृत हुई थी.

एनजीटी के आदेश, हटाओ अवैध निर्माण
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल एनजीटी ने 11 जनवरी को वीडी मार्केट के 51 लोगों को नोटिस दिए थे, जिसमें दुकान और आवास हटाए जाने का उल्लेख किया गया है. नगर निगम और जिला प्रशासन कार्रवाई करता, उसके पहले व्यापारियों ने स्टे ले लिया. वीडी क्लॉथ मार्केट के व्यापारियों ने बताया कि वीडी मार्केट में हमने 1972 में जमीन खरीदी, सरकारी मंजूरी ली उसी के बाद 51 दुकाने नियमानुसार बनाई है. जो की 1312 सर्वे नंबर पर बनी है, जहां मार्केट बनाया है, इसका सर्वे नंबर अलग है और जो गोवर्धन सागर तालाब है उसका सर्वे नंबर अलग है, पूरा विवाद 1281 है, हमारा 1281 से कोई लेना देना ही नही है। प्रशासन विधिक राय लेकर कार्रवाई करने की बात कर रहा है.

होटल मित्तल पर स्टे
उज्जैन इंदौर हरी फाटक बायपास मार्ग पर होटल मित्तल का अवैध निर्माण को भी एनजीटी ने हटाने के आदेश दिए हैं. बताया जा रहा है कि शादी विवाह का सीजन चल रहा है ऐसे में होटल मालिक ने पक्ष रखा है कि उनके यहां पर शादियों की बुकिंग है, ऐसे में बुकिंग करने वालों का नुकसान हो जाएगा. इस एवज में कोर्ट ने स्टेट दिया है, जिला प्रशासन स्टे हटते ही अवैध निर्माण हटाने की कार्रवाई करेगा. उक्त होटल का कुछ हिस्सा ग्रीन बेल्ट में निर्मित किया गया है

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