
श्योपुर। कूनो नेशनल पार्क में अफ्रीकी महाद्वीप से चीते लाए गए थे। यह वर्ल्ड का प्रथम ऐसा प्रोजेक्ट था जब किसी एक महादीप से दूसरे महाद्वीप से कोई जानवर लाकर बसाया गया हो। लगातार चीतो की मौत के कारण इस प्रोजेक्ट को पूरी तरह से सफल नहीं माना जा रहा है लेकिन कूनो प्रबंधन चीतो की इंडियन जनरेशन तैयार करने में जुटा है,भारत की धरती पर 12 चीते पैदा हुए है।
इन शावको की देखभाल और बडे व्यस्क चीतो को बचाने की कवायाद में कूनो नए चीते लाना भूल गया है। जानकार बताते है कि अगर 2 माह तक विदेशी चीते नहीं आए तो अगले शीतकाल का इंतजार करना पड़ सकता है।
हर साल 10 चीते लाने का अफ्रीका से करार
अफ्रीका से सालाना 10 चीते लाने के करार के बाद भी और चीते नहीं ला सका है। जबकि अब तक चीतों की एक और खेप आ जाना चाहिए थी, क्योंकि चीतों को लाकर यहां बसाने के लिए सर्दियों का मौसम ही उपयुक्त माना जाता है। पार्क प्रबंधन से जुड़े लोग भी यह बात बताते हैं, कहते हैं कि 15
मार्च तक चीतों की नई खेप नहीं आई, तो उन्हें इस सीजन में लाना ठीक नहीं रहेगा, क्योंकि गर्मियों का मौसम आ जाएगा, जो चीतों को बसाने के लिहाज से ठीक नहीं है।
इसीलिए यह माना जा रहा है कि यदि मार्च तक चीतों की नई खेप नहीं आई तो फिर इन्हें इस सीजन में नहीं लाया जाएगा। उसके बाद इंतजार रहेगा बारिश और सर्दियों के मौसम का, क्योंकि यही सीजन ठीक माना जाता है।
नामीबिया से और दक्षिण अफ्रीका से आए थे
कूनो नेशनल पार्क में नामीबिया से 8 तथा दक्षिण अफ्रीका से 12 चीते लाए गए। दक्षिण अफ्रीका से 12 चीते फरवरी 2023 में लाए गए, अब 2025 आने को है, लेकिन दूसरी खेप नहीं लाई गई है, जबकि दो साल होने को हैं।
