कान्ह और सरस्वती नदी के कायाकल्प की बन रही डीपीआर

नमामि गंगे प्रोजेक्ट के तहत रिवर साइड कॉरिडोर का होगा निर्माण
नगर निगम या लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग करेगा काम
675 करोड़ रुपए होगी लागत

इंदौर:गंगा जमुना बेसिन की इंदौर से होकर गुजरने वाली कान्ह और सरस्वती नदियां के कायाकल्प की डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट बन रही है. यह डीपीआर आईडीए बना रहा है. उक्त दोनों नदियों का कायाकल्प केंद्र सरकार के नमामि गंगे प्रोजेक्ट के तहत किया जाएगा. उक्त प्रोजेक्ट का काम प्रदेश के लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग या नगर निगम में से कोई एक एजेंसी करेगी.आईडीए इंदौर शहर के पुरानी नदियों के अस्तित्व को लौटाने के लिए कार्य कर रहा है. केंद्र सरकार के नमामि गंगे प्रोजेक्ट के तहत इंदौर की नदियों को पुनः जिंदा करने के लिए तीन चरणों में डीपीआर बना रहा है. प्रस्तावित डीपीआर में 675 करोड़ रुपए लागत आने की संभावना है.

इसके तहत नहर भंडारा से एमआर-10 आईएसबीटी तक रिवर साइड कॉरिडोर का निर्माण होगा. साथ ही कॉरिडोर के दोनों तरफ हरित क्षेत्र विकसित करने के साथ प्रदूषण नियंत्रण मुख्य उद्देश्य रखा गया है. द्वितीय चरण में शहर के बीच निगम सीमा का 13 किलोमीटर का हिस्सा और तृतीय चरण में शहर के विभिन्न क्षेत्र से नदियों में मिलने वाले नालों का गंदा पानी रोकने के योजना बनाई गई है. दोनों नदियों के कायाकल्प के लिए अलग अलग सेक्टर बनाकर काम करने और उसके तहत नदियों के मिलन स्थल को संगम तट के रूप में विकसित कर शहर की सुंदरता में नया आयाम स्थापित करने का प्रोजेक्ट बनाकर मंजूरी के लिए केंद्र सरकार के जल संसाधन मंत्रालय को भेजा जाएगा. इसको अंतिम रूप दिया जा चुका है, जिसमें शहर के नक्शे में नदियों को दर्शाते हुए कायाकल्प की योजना बताई गई है.

यह होगा कॉरिडोर में काम
* रिटर्निग वॉल या स्टोन पीचिंग
* स्टॉप डैम
* पैदल या साइकिल ट्रैक
* सड़क नेटवर्क
* पैदल यात्री पुल
* हरित क्षेत्र जैसे पार्क, उद्यान, जॉगिंग ट्रैक और प्लाजा

चार चरणों में होगा विकसित
1. नाहर भंडारा से कृष्णपुरा पुल – सरस्वती नदी 7.5 किमी.
2. पिपलिया पाला से बद्रीबाग – सरस्वती नदी 1.8 किमी.
3. तीन इमली से कृष्णपुरा  – कान्ह नदी 5.6 किमी.
4. कृष्णपुरा से आईएसबीटी – 7.6 किमी.

वास्तविक स्थिति का परिचय
कान्ह और सरस्वती नदियां गंगा जमुना बेसिन की नदी है। इंदौर से उक्त दोनों  नदियों का 35.5 किलोमीटर हिस्सा होकर गुजरता है। उसके अनुसार
1. शहर के दक्षिण से पूर्वी रिंग रोड से उत्तर में एमआर – 10 तक प्रथम चरण में  22.5 किलोमीटर
2. नगर निगम क्षेत्र की अतिरिक्त लंबाई द्वितीय चरण में 13 किलोमीटर
3. अतिरिक्त नाले , जो विभिन्न स्थानों से आकर नदियों में रहे है तृतीय चरण – 26.7 किलोमीटर

परियोजना का उद्देश्य

* नदियों के जलग्रहण क्षेत्रों का कायाकल्प
* सतत जलप्रवाह बनाएं रखना
* नदियों के किनारों से झुग्गी बस्ती एवं अन्य गतिविधियों पर रोक और पुनर्वास
* प्रदूषण नियंत्रण
* अतिक्रमण मुक्त करना
* किनारों पर पार्क, फुटपाथ का विकास, साइकिल ट्रैक, जॉगिंग ट्रैक और पद यात्रियों चलने का निर्माण करना ।

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