आर्थिक अपराध शाखा रीवा की टीम ने की कार्रवाई, सीमांकन के एवज में कृषक से मांगे थे 40 हजार
सतना:शासकीय सेवक के तौर पर कार्य करने के एवज में भले ही हर महीने शासन की ओर से मोटा वेतनमान प्राप्त होता हो, लेकिन इसके बावजूद भी अमला रिश्वतखोरी की मानसिकता से उबर नहीं पा रहा है. मैहर में राजस्व निरीक्षक, पटवारी, उपयंत्री और मुख्य नगर पालिका अधिकारी को रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़े जाने की घटना को अभी महीना भर भी नहीं बीतने पाया था कि जिले में एक और राजस्व निरीक्षक को दबोच लिया गया. शुक्रवार को आर्थिक अपराध शाखा रीवा की टीम ने राजस्व निरीक्षक को 14 हजार रु की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ लिया.
पुलिस अधीक्षक आर्थिक अपराध शाखा रीवा अरविंद सिंह ठाकुर ने जानकारी देते हुए बताया कि सतना जिले की बिरसिंहपुर तहसील में पदस्थ राजस्व निरीक्षक अजय सिंह को 14 हजार रु की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ा गया है. पेशे से कृषक और ग्राम बिरसिंहपुर निवासी रमेश पाण्डेय द्वारा ई ओ डब्ल रीवा में इस बात की शिकायत की गई थी कि जमीन का सीमांकन कराने के एवज में राजस्व निरीक्षक द्वारा रिश्वत की मांग की जा रही है. उक्त शिकायत की तस्दीक कराई गई. जिसमें शिकायत सही पाए जाने पर एसपी ई ओ डब्लू रीवा द्वारा आगे की कार्रवाई के लिए निर्देशित किया.
जिसके आधार पर आर्थिक अपराध शाखा रीवा की 12 सदस्यीय टीम गठित की गई. पूर्व निर्धारित योजना के अनुसार शिकायतकत्र्ता कृषक ने राजस्व निरीक्षक को रिश्वत के पैसे देने के लिए सतना स्थित सर्किट हाउस में बुलाया. जहां पर कृषक द्वारा रिश्वत के 14 हजार रु दिए जाते ही पहले से तैयार टीम ने राजस्व निरीक्षक को रंगे हाथ दबोच लिया. ईओडब्लू की औचक कार्रवाई देख आरआई पूरी तरह हक्का-बक्का हो गया. जिसके बाद आरोपी राजस्व निरीक्षक के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम संशोधन अधिनियम 2018 के अंतर्गत प्रकरण दर्ज करते हुए आगे की कार्रवाई की गई. राजरूव निरीक्षक को रंगे हाथ पकडऩे वाली आर्थिक अपराध शाखा रीवा की टीम में उप पुलिस अधीक्षक किरण किरो, निरीक्षक मोहित सक्सेना, उनि अभिषेक पाण्डेय और उनि अ संतोष पाण्डेय सहित प्रधान आरक्षक और आरक्षक शामिल रहे.
टाल-मटोल करता रहा आरआई
शिकायतकत्र्ता रमेश पाण्डेय ने जानकारी देते हुए बताया कि बिरसिंहपुर में 4 नंबरों की आराजी का सीमांकन कराने के लिए विधिवत प्रक्रिया के अंतर्गत आवेदन दिया गया था. जिसके चलते तहसीलदार द्वारा भी राजस्व निरीक्षक को सीमांकन के निर्देश दे दिए गए थे. लेकिन जब राजस्व निरीक्षक टाल-मटोल करने लगे तो लोगों ने बताया जब तक वे व्यक्तिगत तौर पर नहीं मिलेंगे तब तक उचित ढंग से कार्य नहीं होगा.
जिसके चलते कृषक ने आरआई से मुलाकात कर सीमांकन करने का निवेदन किया. यह सुनते ही आरआई ने कृषक से दो टूक कहा कि इन 4 नंबरों की आराजी भले ही छोटी हों, लेकिन उनका सीमांकन करने के लिए उन्हें 40 हजार रु चाहिए. कुछ दिन बाद ही आरआई ने कृषक को बुलाया और पटवारी को 6 हजार रु देने के लिए कहा. लेकिन पटवारी को पैसे देने के बाद भी आरआई की टालमटोल जारी रही. जिसके चलते कृषक ने ईओडब्लू रीवा में शिकायत कर दी. शिकायत की तस्दीक कराए जाने की प्रक्रिया के अंतर्गत ही कृषक ने आरआई को सर्किट हाउस में बुलाया और 20 हजार रु की रिश्वत दे दी. जिसके बाद आरआई को रंगे हाथ ट्रैप करने के लिए शेष बची 14 हजार की रकम देने के लिए शुक्रवार को सर्किट हाउस में बुलाया गया था. इसी कड़ी में कृषक ने चौंकाने वाला खुलासा करते हुए कहा कि रिश्वत की काफी रकम आरआई द्वारा अपने खाते में जमा करा ली जाती है. लिहाजा उनके खातों की जांच भी होनी चाहिए.
महीने भर में 5वीं कार्रवाई
सतना के सर्किट हाउस में राजस्व निरीक्षक को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़े जाने की घटना के ठीक महीने भर पहले यानी 14 दिसंबर को मैहर में लोकायुक्त द्वारा भ्रष्टाचार कि विरुद्ध ताबड़तोड़ कार्रवाई की गई थी. लोकायुक्त रीवा द्वारा एक ही दिन में राजस्व निरीक्षक राघवेंद्र सिंह, पटवारी अरुण सिंह और मप्रपूक्षेविविकंलि के ताला स्थित कार्यालय में पदस्थ उपयंत्री राजेश पटेल को रंगे हाथ पकड़ा था. जिसमें राजस्व निरीक्षक-पटवारी को 20 हजार और उपयंत्री को 30 हजार की रिश्वत लेते पकड़ा गया था. लेकिन इस घटना के बावजूद भी शासकीय कर्मचारियों की रिश्वतखोरी की मानसिकता में रत्ती भर भी अंतर देखने को नहीं मिला. लिहाजा सप्ताह भर के भीतर ही 20 दिसंबर को मुख्य नगर पालिका अधिकारी मैहर लालजी ताम्रकार को 20 हजार रु की रिश्वत लेते हुए लोकायुक्त ने रंगे हाथ पकड़ा था. इस लिहाज से देखा जाए तो महीने भर के अंदर मैहर-सतना में 5 भ्रष्टाचारियों को रंगे हाथ पकड़ा जा चुका है
