
करीब 2 करोड़ 80 लाख रूपये खर्च, डीएमएफ फण्ड से मंजूर हुआ था नाली निर्माण कार्य, जमकर हुई भर्रेशाही
नवभारत न्यूज
सिंगरौली 16 जनवरी। जिला मुख्यालय बैढ़न के करीब 15 किलोमीटर के परिधि में पॉच की संख्या में बाजारों के सड़क मार्गो में वर्ष 2021-22 में नालियों के निर्माण के लिए तकरीबन 3 करोड़ 50 लाख रूपये की रकम की राशि डीएमएफ फण्ड से मंजूर हुई थी। लेकिन पिछले चार सालों में क्रियान्वयन एजेंसी आरईएस के कागजों में कार्य प्रगति पर है।
गौरतलब है कि देवसर विधानसभा क्षेत्र के तत्कालीन विधायक सुभाष वर्मा के वर्ष 2021-22 में खनिज प्रतिष्ठान मद से पॉच की संख्या में नाली निर्माण के लिए राशि मंजूर की गई थी। जिसमें कुल रकम तकरीबन 3 करोड़ 50 लाख रूपये है। वही हैरानी की बात है कि उक्त रकम में से करीब 2 करोड़ 80 लाख रूपये क्रियान्वयन एजेंसी ग्रामीण यांत्रिकी सेवा सिंगरौली व्यय भी कर चुका है। करीब चार साल का वक्त पूरा हो गया है। इसके बावजूद उक्त कार्य को आरईएस विभाग के अधिकारी प्रगति पर बता रहे हैं। जबकि हर तीसरे या चौथे महिने संबंधित प्रभारी के अध्यक्षता में वर्ष 2022 से लेकर कई बार खनिज प्रतिष्ठान मद की बैठके भी आयोजित की जा चुकी हैं। बैठको में अब तक क्या नतीजा निकला यह सबसे बड़ा उदाहरण हैं। पिछले चार वर्षो के दौरान नालियों के निर्माण कार्य की प्रगति इसी तरह है तो कहीं न कहीं ग्रामीण यांत्रिकी सेवा के जिम्मेदार अधिकारी सवालों में जरूर घिरेंगे और उनसे सवाल भी पूछा जाएगा। आरोप तो यहां तक लग रहे हैं कि नालियों का निर्माण कार्य धरातल में कम कागजो में ज्यादा हुआ है। शायद इसीलिए चार साल से विभाग के जिम्मेदार अधिकारी विभागीय कामकाज पर पर्दा डालने के लिए कार्य को प्रगति बताकर जिम्मेदारी से बचने का हर संभव प्रयास कर रहे हैं। यहां बताते चले कि आरईएस विभाग सिंगरौली के अधिकारी अपने कारनामों के चलते आये दिन सुर्खियों में बने रहते हैं। चितरंगी ब्लॉक में 140 विद्यालयों के मरम्मत कार्य के नाम पर जमकर किरकिरी हो रही है। वही अब नालियों के निर्माण कार्य चार वर्षो से निर्माणाधीन और धरातल पर अधिकांश स्थानों में नालियों का न दिखाई दिये जाने को लेकर आरईएस के अधिकारी सवालों के झमेले में फंसते नजर आ रहे हैं।
कार्यो के पूर्ण कराने आरईएस अमले में नही है दिलचस्पी
क्रियान्वयन एजेंसी ग्रामीण यांत्रिकी सेवा सिंगरौली के जिम्मेदार अधिकारियों पर इस बात का आरोप लग रहा है कि डीएमएफ से मंजूर निर्माण कार्यो को पूरा कराने के लिए विशेष दिलचस्पी नही रख रहे हैं। हालांकि मूल्यांकन के आधार पर उन्हें 60 प्रतिशत राशि मिल चुकी है और अधिकारी राशि व्यय भी कर चुके हैं। वर्ष 2021-22 में 89 आंगनवाड़ी केन्द्र भवन के उन्नयन कार्य, वर्ष 2022 में सरई एवं ग्राम बरगवां स्थित तालाब के सतही जल प्रदूषण निवारण संबंधी कार्य, वर्ष 2023 में कृषि विज्ञान केन्द्र के पास देवरा में चेक डेम निर्माण कार्य, तीन आजीविका भवन निर्माण, सामुदायिक भवन निर्माण पापल सहित कुछ बालिका छात्रावास जिनकी संख्या चार है। इनके कार्य भी अभी तक पूरे नही हुये हैं। यदि कार्य पूरे हुये हैं तो एनओसी जारी कराने में लेट लतीफी होने पर सवाल उठेगा ही।
यहां स्वीकृति हुई थी डीएमएफ की राशि
जानकारी के अनुसार बैढ़न विकास खण्ड के खुटार बाजार एवं माड़ा-मकरोहर मार्ग में करीब 80-80 लाख रूपये, रजमिलान मुख्य मार्ग बाजार में 63 लाख रूपये, रजमिलान-अमिलिया मार्ग में 40 लाख रूपये, परसौना एवं बरगवां मुख्य मार्ग में करीब 18 लाख रूपये से अधिक की रकम खनिज प्रतिष्ठान मद से वर्ष 2021 में अक्टूबर-नवम्बर के महीने में प्रशासकीय स्वीकृति मिली थी। इनमें से करीब 2 करोड़ 80 लाख रूपये मूल्यांकन के अनुसार राशि व्यय भी की जा चुकी है। इसके बावजूद कार्य प्रगति पर बताया जा रहा है। सवाल उठ रहा है कि चार साल से उक्त कार्य प्रगति पर क्यों है। आरईएस विभाग के जिम्मेदार अधिकारी सवालों के जवाब देने से भागते नजर आते हैं। वही चर्चाएं हैं कि नालियों के निर्माण कार्य में व्यापक पैमाने पर गड़बड़झाला हुआ है। इस तरह के आरोप भी लगाये जा रहे हैं।
