
नई दिल्ली, 04 नवम्बर 2025: मुंबई में 2 नवंबर को खेले गए आईसीसी महिला क्रिकेट वर्ल्ड कप के फाइनल मुकाबले में भारतीय टीम ने साउथ अफ्रीका को हराकर इतिहास रच दिया। इस ऐतिहासिक जीत में उत्तर प्रदेश के आगरा की ऑलराउंडर दीप्ति शर्मा ने अहम भूमिका निभाई। फाइनल मैच में उन्होंने शानदार अर्धशतक बनाया और बेहतरीन गेंदबाजी करते हुए 5 विकेट लिए। इस प्रदर्शन के साथ वह महिला या पुरुष वनडे वर्ल्ड कप के इतिहास में 20 से अधिक विकेट और 200 से अधिक रन बनाने वाली पहली क्रिकेटर बन गईं। महज 17 साल की उम्र में भारत के लिए डेब्यू करने वाली दीप्ति की सफलता के पीछे एक प्रेरणादायक कहानी है।
दीप्ति के क्रिकेटर बनने की कहानी में उनके बड़े भाई सुमित शर्मा का योगदान सबसे बड़ा है, जिन्होंने दीप्ति को स्टार बनाने के लिए अपने क्रिकेट करियर ही नहीं, बल्कि नौकरी तक की बलि दे दी। सुमित ने 8 साल की उम्र में दीप्ति को एकलव्य स्पोर्ट्स स्टेडियम में ट्रेनिंग के लिए ले जाना शुरू किया था। सुमित को यह पता था कि ऑलराउंडर बनना टीम इंडिया में जाने का सबसे बेहतर रास्ता है, इसलिए उन्होंने दीप्ति को मीडियम पेसर से स्पिनर बनाया और टॉप ऑर्डर में बल्लेबाजी पर ध्यान केंद्रित किया। 2012-13 में, सुमित ने अपना करियर छोड़ने का बड़ा फैसला लिया ताकि वह पूरी तरह से दीप्ति की ट्रेनिंग पर ध्यान केंद्रित कर सकें।
नौकरी छोड़कर सुमित ने घर के पास एक किराए की जगह पर दीप्ति को पहले से ज्यादा कड़ी ट्रेनिंग दी और उसे इंडिया के लिए एक भरोसेमंद ऑलराउंडर बनाने का अपना वादा पूरा किया। आज सुमित अपने घर के पास एक एकेडमी में कोचिंग देते हैं। दीप्ति की सफलता पर गर्व महसूस करते हुए सुमित शर्मा कहते हैं कि “आज जब दीप्ति खेलती है, तो मैं उसके साथ इंडिया के लिए खेलता हूँ।” यह कहानी परिवार के अटूट समर्थन और एक भाई के त्याग को दर्शाती है, जिसकी बदौलत दीप्ति शर्मा ने क्रिकेट जगत में यह गौरवशाली मुकाम हासिल किया है।
